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हस्त रेखा शास्त्र

May 01, 2018
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प्राचीन काल से मशहूर हस्त रेखाओं का ज्योतिष वर्तमान में भी बहुत प्रसिद्ध है। हस्त रेखाओं से आप अपने अतीत, वर्तमान और भविष्य के बारे में जान सकते हैं- आप अतीत में क्या कर रहे थे? आप वर्तमान में क्या कर रहे हैं? आप भविष्य में क्या कर रहे होंगे? इन सभी सवालों का जवाब आपकी हस्त रेखाओं में छुपा है। हालांकि हस्तरेखा शास्त्र की प्रामाणिकता और ज्योतिष भविष्यवाणियों की विश्वसनीयता पर बहुत बहस है, मगर फिर भी एक बड़े पैमाने पर लोग हस्तरेखा विद्या की ओर आकर्षित हुए हैं। हस्तरेखा विद्या पामिस्ट्री, कैरोमंसी या चिरोलोजि के रूप में विख्यात है। निश्चित भविष्यवाणी करने के लिए हस्तरेखा चार्ट का उपयोग किया जाता है। हस्तरेखा शास्त्र के विभिन्न स्कूलों में इसकी व्याख्या की विधि भिन्न हैं। वर्तमान में तीन बुनियादी स्कूलों में हस्तरेखा शास्त्र विकसित हुए है -भारतीय, चीनी, और ग्रीक हस्तरेखा शास्त्र।  

हस्त रेखाओं के द्वारा भविष्य- 

दुनिया भर में मानव शरीर पर रेखाओं के माध्यम से भविष्यवाणी करना व्यापक रूप से प्रचलित रहा है।  हस्त रेखाओं के द्वारा भविष्य बताने में दक्षिण एशियाई देशों में भारत अग्रणी है। रेखाओं को पढ़ना एक कला है। हस्तरेखा शास्त्र आपके स्वास्थ्य, प्रेम-संबंध और जीवन के बारे में कई राज खोलता है और इसमें हथेली की हर रेखा अहम होती है।

तीन प्रकार की रेखाएं – 

वैसे तो हर व्यक्ति की हथेली पर रेखाओं का जाल होता है पर हथेली की रेखाएं पढ़ने के लिए तीन मुख्य रेखाओं को पढ़ा जाता है। हाथ में ये तीन प्रकार की रेखाएं होती है जो व्यक्ति के भविष्य के बारे में कई महत्वपर्ण जानकारियां देती हैं। मुख्य रेखाएं है - मस्तिष्क रेखा, हृदय रेखा, जीवन रेखा और भाग्य रेखा। इन प्रमुख रेखाओं के साथ-साथ कुछ मामूली रेखाएं जैसे शादी रेखा, यात्रा रेखा आदि भी होती है।

1. मस्तिष्क रेखा - हथेली के एक छोर से दूसरे छोर तक उंगलियों के पर्वतों तथा हृदय रेखा के समानान्तर जाने वाली रेखा को मस्तिष्क रेखा कहते हैं। 
2. हृदय रेखा - हथेली के मध्य में एक भाग से लेकर दूसरे भाग तक लेटी हुई रेखा को हृदय रेखा कहते हैं। हृदय रेखा ऊपर की ओर घटते हुए मध्यम और तर्जनी के बीच जाकर खत्म होती है। 
3. जीवन रेखा (लाइफ लाइन)- जो रेखा अंगूठे के ठीक नीचे शुक्र पर्वत को घेरे रहती है वो जीवन रेखा कहलाती है। यह रेखा इंडेक्स फिंगर के नीचे स्थित गुरु पर्वत के आसपास से प्रारंभ होकर हथेली के अंत मणिबंध की ओर जाती है। जीवन रेखा हृदय रेखा के ऊपरी भाग से शुरु होकर मणिबन्ध पर जाकर समाप्त हो जाती है।
4. भाग्य रेखा - हृदय रेखा के मध्य से शुरु होकर मणिबन्ध तक जाने वाली सीधी रेखा को भाग्य रेखा कहते हैं।
माउंट्स अर्थात हाथ पर बने हुए उठाव या पर्वत 

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हथेली पर उठाव या पर्वत भी होते है जो भविष्य बताते है। ये उठाव ग्रीक हस्तरेखा शास्त्र से निकाले गये है और ग्रीक देवी-देवताओं के नाम पर रखे जाते हैं। माउंट्स अर्थात हाथ पर बने हुए उठाव हर उंगली के नीचे मांस का आरोह होते हैं। 
शुक्र पर्वत (अंगूठे के नीचे स्थित) - प्रेम, सौंदर्य, और कलात्मक भावना का प्रतीक
बृहस्पति पर्वत (तर्जनी के नीचे स्थित) - दृढ़ निश्चयी, आदर्शवादी, सच्चे प्रेमी का प्रतीक
शनि पर्वत (मध्यम उंगली के नीचे स्थित) -  धैर्य, कड़ी मेहनत और व्यावहारिकता का प्रतीक
अपोलो पर्वत (अनामिका के नीचे स्थित) - ऊर्जा, रचनात्मकता, और करुणा का प्रतीक
बुध पर्वत (छोटी उंगली के आधार पर स्थित) - व्यावसायिक कौशल, बुद्धि, और बहुमुखी प्रतिभा का प्रतीक
लूना माउंट या चंद्रमा पर्वत (अंगूठे के निचले अंत में निचले हिस्से में स्थित) - रचनात्मकता, जुनून, और शर्म का प्रतीक

हाथों की आकृति/ आकार - 

आपके हाथ का आकार निर्भर करता है कि किस प्रकार का है - आपका हाथ का आकार एक पृथ्वी, अग्नि, वायु या जल तत्व जैसा हो सकता है।
पृथ्वी आकार का हाथ -  चौड़ी वर्ग की उंगलिया और रूखी त्वचा के साथ हथेलियां। 
अग्नि आकार का हाथ -  चौकोर या आयताकार हथेलिया जिसमें गुलाबी त्वचा होती है। 
वायु आकार का हाथ -  चौकोर या आयताकार हथेलियों के साथ सूखी त्वचा के साथ लंबी उंगलिया। 
जल आकार का हाथ -  कम अंडाकार आकार में लचीला शंक्वाकार उंगलियों के साथ हथेलियां।

हस्त रेखा, चिन्ह और मणिबंध

जिस तरह हर मनुष्य की जन्म कुंडली में ग्रहों के अनेक योग होते हैं उसी प्रकार हाथ में स्थित रेखाओं, चिन्हों और मणिबंध से भी कई योग बनते हैं। आपके शरीर का वो हिस्सा जो आपकी हथेली को हाथ के साथ जोड़ता है उसे कलाई कहा जाता है और इस जोड़ पर मौजूद रेखाएं ब्रेसलेट लाइन्स या मणिबंध रेखाएं कहलाती हैं। इन्हें रॉकेट लाइन भी कहा जाता है।

हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार मणिबंध रेखाओं से किसी भी व्यक्ति के जीवन और भाग्य की जानकारी मिलती है। मणिबंध की ये रेखाएं आपकी उम्र को भी दर्शाती हैं। किस व्यक्ति की कलाई पर कितनी मणिबंध रेखाएं होंगी इसका कोई भी अंदाज़ा नहीं लगा सकता और न ही इसकी कोई निश्चित संख्या होती है।
हर व्यक्ति की कलाई में मणिबंध रेखाओं की संख्या अलग-अलग होती है। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार एक मणिबंध रेखा से व्यक्ति की आयु लगभग 25 वर्ष बताई जाती है और इस प्रकार उम्र का आंकलन किया जाता है। पहली स्पष्ट रूप से चिन्हित मणिबंध रेखा जीवन के 23 से 28 वर्षों को दिखाती है। दूसरी मणिबंध रेखा जीवन के 46 से 56 वर्ष दिखाती है। तीसरी मणिबंध रेखा जीवन के 69 से 84 साल दिखाती है और चौथी रेखा लंबी आयु का प्रतीक होती है। यदि मणिबंध रेखाओं में कटाव हो, तो व्यक्ति का जीवन बाधाओं से भरा हुआ और कष्टदायक होता है। अगर रेखाएं गहरी और स्पष्ट हों, तो व्यक्ति का जीवन सुखी होता है।

हथेली में है धन की रेखा

हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हथेली पर पाए जाने वाले चिह्नों व रेखाओं से जीवन में धन लाभ कब होगा व कितना होगा इन बातों का अंदाजा लगाया जा सकता है। हथेली में जीवन रेखा, स्वास्थ्य रेखा, भाग्य रेखा एवं सूर्य रेखा के स्पष्ट दिखने से अष्टलक्ष्मी योग बनता है। जिसके भी हाथ में ऐसा योग हो, उसके ऊपर मां लक्ष्मी की कृपा होती है।

जब भाग्य रेखा मणिबंध से निकल कर शनि पर्वत पर जाकर उसके मध्य बिन्दु को छूती हो और सूर्य रेखा चंद्र पर्वत से प्रारंभ होकर सूर्य पर्वत के समीप जाए, तो यह अष्टलक्ष्मी योग बनाता है। ऐसा व्यक्ति भाग्यशाली और आर्थिक रूप में सम्पूर्ण होता है, भौतिक सुख उसके जीवन में असीम होते हैं। मान-सम्मान के साथ-साथ वह मकान, जमीन-जायदाद, वाहन आदि का भी पूर्ण सुख भोगता है।

सिद्धांत रेखाएं

मस्तिष्क, हृदय और जीवन रेखा आपकी हथेली की तीन मुख्य रेखाएं हैं जो सिद्धांत रेखाएं भी कहलाती हैं। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार, मस्तिष्क रेखा मानव जाति का, हृदय रेखा स्वर्ग का और जीवन रेखा पृथ्वी का प्रतीक है। ये मुख्य रेखाएं आपके हाथ पर गहरी और स्पष्ट दिखाई दें और इनके बीच कोई कटाव भी ना हो, तो आप एक सहज और सफल जीवन जीते हैं और धन के मालिक भी होते हैं। 

जब सभी मुख्य रेखा (मस्तिष्क, हृदय और जीवन रेखा) से निकली शाखाएं ऊपर की ओर जाती हैं, तब भी व्यक्ति के जीवन में धन का योग होता है। हथेली पर त्रिशूल, तारा, मछली या मंदिर जैसे चिह्न होना भाग्यशाली होने का संकेत है।

नियति रेखा

भाग्य रेखा या नियति रेखा व्यक्ति के जीवन के बहुत सारे पहलुओं को दर्शाती है। व्यक्ति के जीवन का स्वरूप इसी रेखा पर निर्भर करता है। भाग्य रेखा में शिक्षा और कॅरियर की दिशा समेत सफलता और बाधा रहित जीवन से जुड़ी सभी बातें होती हैं। सीधे शब्दों में कहें तो आपके कॅरियर की सफलता आपकी हस्त रेखाओं में है। कॅरियर के चुनाव की बात आती है तो अक्सर लोग इसमें गलती कर बैठते हैं, नतीजा यह होता है कि काफी संघर्ष करने के बाद भी निराशा और असफलता का झेलना पड़ता है। ऐसी समस्या से बचने के लिए आप हस्तरेखा शास्त्र की सहायता ले सकते हैं।

हस्त रेखाओं से बनने वाले चिन्हों का मतलब

जीवन रेखा गोल हो, मस्तिष्क रेखा दो भागों में विभाजित हो रही हो और एक त्रिकोण का चिन्ह बन रहा हो, अगर ये तीन लक्षण आपकी हथेली पर हैं तो जीवन में धन-संपंति का होना निश्चित है। 
जब आपकी हस्त रेखाओं में भाग्यरेखा हथेली के अंत स्थान से शुरू होकर शनि पर्वत तक पंहुच रही हो, ऐसा होने पर आपको सफलता जरूर मिलती है और धन-संपत्ति पाने का सबसे बड़ा सूचक सफलता पाने का संकेत ही है। 
जब आपकी तीन मुख्य हस्त रेखाएं - जीवन रेखा, मस्तिष्क रेखा और भाग्य रेखा सही लंबाई में हों और इनपर कोई अशुभ चिह्न न हो, ऐसी स्थिति भी आपके भाग्य में अपार धन-संपति का सुख दिखाता है।
जब भाग्य रेखा शनि पर्वत तक सीधे पहुंचती है तो व्यक्ति बेहद भाग्यशाली होता है। ऐसे व्यक्ति मेहनती होने के साथ-साथ महत्वाकांक्षी और अपने लक्ष्य को पूरा करने वाले होते हैं।
जब भाग्य रेखा शनि पर्वत पर पहुंचकर दो या अधिक भागों में बंट जाए, तो व्यक्ति को अपने कॅरियर में सफलता, अच्छा प्रमोशन और सम्मान मिलता है।
शुक्र, बृहस्पति और सूर्य रेखा के मिलान से आपके जीवन में सफलता की संभावना बढ़ जाती है। अगर सूर्य रेखा एक सीधी रेखा के रूप में हो, इसकी लंबाई 1 सेमी से 6 सेमी तक हो, जो कलाई से निकलकर अनामिका अंगुली के आधार तक पहुंचे, तो व्यक्ति को नौकरी में प्रमोशन, वित्तीय मामलों में प्रसिद्धि और सफलता मिलती है। सूर्य रेखा गहरी, सीधी और अटूट हो, तो कॅरियर में सफलता निश्चित होती है।
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