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अंक ज्योतिष सार संग्रह

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ज्योतिष केवल भाग्य जानने का एक आसान ज़रिया नहीं है,  बल्कि ये एक विज्ञान भी है। ज्योतिष का क्षेत्र तो काफी विस्तृत है परंतु अंक शास्त्र का क्षेत्र ज्योतिष की तुलना में सीमित है। अंकों का हमारे जीवन में बहुत बड़ा योगदान है। अंक विज्ञान ज्योतिष की ही एक शाखा है। कोई वाहन खरीदते समय हम गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नंबर अपने अनुकूल लेना चाहते है। मकान खरीदते समय, व्यवयास शुरू करते समय या परीक्षाओं में रोल नंबर आदि को हम हमेशा ये देखते है कि वो अंक हमारे अनुकूल है या नहीं। हर जगह हम अंकों में अपना भविष्यफल खोजने लगते हैं। आजकल बड़े-बड़े फिल्मी सितारें, बड़ी सफल हस्तियां भी अंक विज्ञान के प्रभाव से अछूती नहीं है। 

स्वामी अंक 

अंकज्योतिष अंकों के आधार पर मनुष्य के भविष्य का आंकलन करता है। अंकज्योतिष एक नंबर या एक से अधिक नंबरों पर आधारित संगम घटनाओं के बीच के रहस्यमय संबंधों के बारे में बताता है। यह शब्द, नाम और विचारों के संख्यात्मक मूल्य का अध्ययन है। अंकशास्त्र विद्या में अंकों का विशेष स्थान होता है और हर व्यक्ति का एक अंक मुख्य अंक होता है जिसे अंक स्वामी बोलते हैं और इसी अंक स्वामी के द्वारा आपके भाग्य का आंकलन किया जाता है। आपके कॅरियर, व्यवसाय, नौकरी, प्रेम और आपके जीवन की हर छोटी व बड़ी बात को आपका स्वामी अंक तय करता है। अंकज्योतिष भविष्यफल पूरी तरह से मूलांक पर आधारित है। अंक ज्योतिष के अनुसार व्यक्ति के नाम के एल्फाबेट्स को जोड़कर भाग्यशाली अंक प्राप्त किया जा सकता है। 

अंक शास्त्र 

अंक शास्त्र भविष्य कथन विज्ञान का एक प्रकार है जिसमें अंको के विश्लेषण द्वारा भविष्य कथन किया जाता है। अंक शास्त्र के अनुसार, लोगों के व्यक्तित्व और भविष्य के बारे में उनसे संबधित संख्या का विश्लेषण कर बहुत कुछ बताया जा सकता है।  कई प्रकार के अंक और उनकी गणनाओं की तकनीक ने अंक शास्त्र को एक नए विशाल क्षेत्र तक पहुंचाया है। अंक शास्त्र में कई प्रकार के अंक होते है जैसे जीवन मार्ग अंक, जन्म अंक, व्यक्तित्व अंक, कार्मिक चक्र अंक आदि।

अंक ज्योतिष और ज्योतिष

ज्योतिष में मूल रूप से तीन तत्व हैं- ग्रह, राशि और नक्षत्र। ग्रह 9, राशियां 12 और नक्षत्र 27 होते हैं। अंक 1 से 9 तक होते हैं। नौ अंकों का संबंध 9 ग्रहों 12 राशियों और 27 नक्षत्रों के साथ जोड़कर भविष्यफल बताया जाता है। यदि कम प्रयास से अधिक गणना करनी हो या शुभ और अशुभ समय अर्थात शुभ वार, तिथि, मास, वर्ष, आयु, लग्न आदि जानना हो तो अंक शास्त्र का प्रयोग किया जाता है। 

डेस्टिनी नंबर 

अंक ज्योतिष में जिस अंक का सबसे अधिक महत्व होता है वह है भाग्यांक जिसे अंग्रेजी में लाइफ पाथ नंबर या डेस्टिनी नंबर भी कहा जाता है। भाग्यांक आपके जन्म की तारीख, महीने और वर्ष को जोड़ कर निकाला जाता है। इसके अनुसार आप अपने जीवन के हर साल के बारे में अनुमान लगाकर अपने कार्यों को उसी अनुरूप ढ़ाल सकते हैं। 

मूलांक - अंक ज्योतिष के अनुसार जन्म तारीख के कुल योग को मूलांक कहते है। जैसे अगर किसी व्यक्ति का जन्म 03-2-1990 को हुआ है तो उसका मूलांक होगा 0 +3 =3
भाग्यांक - आपके जन्म की तारीख, महीने और साल के कुल योग को भाग्यांक कहते है। जैसे अगर किसी व्यक्ति  का जन्म 03-2-1990 को हुआ है तो उसका भाग्यांक होगा 0 +3 +2 +1 +9 + 9 +0 =24 =2 +4 = 6 
सौभाग्य अंक - हर व्यक्ति का एक और अंक होता है जिसे सौभाग्य अंक कहते हैं। यह नम्बर परिवर्तनशील है। व्यक्ति के नाम के अक्षरों के कुल योग से बनने वाले अंक को सौभाग्य अंक कहा जाता है,
जैसे कि मान लो किसी व्यक्ति का नाम AMAN है, तो उसका सौभाग्य अंक  A=1, M=4, A=1, N=5 = 1+4+1+5 =11  =1+1 = 2 होगा। 
यदि किसी व्यक्ति का सौभाग्य अंक उसके अनुकूल नहीं है तो उसके नाम के अंको में घटा जोड़ करके सौभाग्य अंक को परिवर्तित किया जा सकता है जिससे कि सौभाग्य अंक उस व्यक्ति के अनुकूल हो सके। सौभाग्य अंक का सीधा सम्बन्ध मूलांक से होता है। व्यक्ति के जीवन में सबसे अधिक प्रभाव मूलांक का होता है। चूंकि मूलांक स्थिर अंक होता है तो वह व्यक्ति के वास्तविक स्वभाव को दर्शाता है तथा मूलांक का तालमेल ही सौभाग्य अंक से बनाया जाता है।
अंक ज्योतिष के आधार पर किसी व्यक्ति का भविष्य किस तरह ज्ञात किया जा सकता है।

राशि क्रम संख्या

मेष 1
वृष 2
मिथुन 3
कर्क 4
सिंह 5
कन्या 6
तुला 7
वृश्चिक 8
धनु 9

चूंकि 1 से 9 तक के अंक के बाद के अंक ज्योतिष में पुनरावृत्ति होती है,
अतः हम 9 के बाद के वाले अंक को पुनः उसी क्रम में रखेंगे-

मकर 10 = 1+0 = 1
कुंभ 11 = 1+1 = 2
मीन 12 = 1+2 =3

इस प्रकार हम राशि के स्वामी का शुभ सहयोगी अर्थात सहानुभूति अंक प्राप्त कर सकते हैं। 

राशि क्रम राशियां और उनके स्वामी

1, 8 मेष, वृश्चिक - मंगल
2, 7 वृष, तुला - शुक्र
3, 6 मिथुन, कन्या - बुध
4 कर्क - चन्द्र
5 सिंह - सूर्य
9, 3 धनु, मीन - गुरु
1, 2 मकर, कुंभ - शनि  

चन्द्र व सूर्य मात्र एक-एक राशि के ही स्वामी हैं अतः इन्हें एकराशि स्वामी भी कहा जाता है। शेष को द्विराशि स्वामी कहा जाता है।  

स्वामी अंक

मंगल 9
शुक्र 6
बुध 5

नोट = राहु 4 तथा केतु 7 को हम क्रमशः सूर्य व चन्द्र के अंतर्गत रख सकते हैं।

चन्द्र 2 - केतु 7
सूर्य 1 - राहु 4
गुरु 3
शनि 8

इस प्रकार हम राशि क्रमों के योग से शुभ सहयोगी अंक प्राप्त कर सकते है। 

राशियां क्रम सहयोगी अथवा शुभ अंक

मेष+वृश्चिक 1 + 8 = 9
वृष +तुला 2 + 7 = 9
मिथुन+कन्या 3 + 6 = 9
कर्क 4 = 4
सिंह 5 = 5
धनु+ मीन 9+3 = 12= 1+2 =3
मकर+कुंभ 1+2 = 3

अतः स्पष्ट है कि मेष+वृश्चिक(1+8 = 9 योग) के स्वामी मंगल का अंक 9 है तथा दोनों राशियों के क्रम का योग भी 9 आ रहा है, अतः इस प्रकार दोनों राशि नामों का शुभ अंक 9 हुआ।  

शुभ अंक निकालने की विधि-

शुभांक = (मूलांक +भाग्यांक + नामांक + स्तूपांक)
उदाहरणार्थ- यहां हम किसी व्यक्ति जिसका नाम अमन है उसका शुभांक निकालते हैं। मान लीजिए अमन का जन्म 1-2-1930 को हुआ। अतः 
अमन का जन्म 1-2-1930 को हुआ था। अतः
मूलांक = 01 = 0 +1 = 1
अतः जन्मतिथि का मूलांक 2 हुआ।
अब भाग्यांक निकालने के लिए जन्मतिथि सहित माह एवं सन्‌ सबको जोड़ लिया जाएगा।
जैसे भाग्यांक = 1-2-1930
0+1+2+1+9+3+0
= 16 = 1+6 = 7
अतः इनका भाग्यांक 7 और मूलांक 2 हैं।
भाग्यशाली अंक, अंकों के रंग और शुभ दिशा-
मूलांक 1 :- यह अंक स्वतंत्र व्यक्तित्व का धनी है। इससे संभावित अंह का बोध, आत्म निर्भरता, प्रतिज्ञा, दृढ़ इच्छा शक्ति एवं विशिष्ट व्यक्तित्व दृष्टि गोचर होता है। इसके स्वामी सूर्य हैं।
मूलांक 2 :- अंक दो का संबंध मन से है। यह मानसिक आकर्षण, हृदय की भावना, सहानुभूति, संदेह, घृणा एवं दुविधा दर्शाता है। इसका प्रतिनिधित्व चन्द्र को मिला है, इस अंक का स्वामी चंद्रमा है 2,11, 20, 29 तारीख अति शुभ हैं। रविवार, सोमवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ दिन हैं। सफेद एवं हल्का हरा इनके शुभ रंग हैं।
मूलांक 3 :- इस अंक के स्वामी देव गुरु बृहस्पति हैं। इससे बढ़ोत्तरी, बुद्धि विकास क्षमता, धन वृद्धि एवं सफलता मिलती है। 3, 12, 21 एवं 30 तारीख इनके लिए विशेष शुभ हैं। मंगलवार, गुरुवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ है। पीला एवं गुलाबी रंग अतिशुभ है। शुभ माह जनवरी एवं जुलाई है। दक्षिण, पश्चिम एवं अग्नि कोण श्रेष्ठ दिशा है।
मूलांक 4 :- इस अंक से मनुष्य की हैसियत, भौतिक सुख संपदा, सम्पत्ति, कब्जा, उपलब्धि एवं श्रेय प्राप्त होता है। इसका प्रतिनिधि हर्षल और राहु हैं। 2, 11, 20 एवं 29 तारीख शुभ है। रविवार, सोमवार एवं शनिवार श्रेष्ठ दिन हैं, जिसमें शनिवार सर्वश्रेष्ठ है। नीला एवं भूरा रंग शुभ है।
मूलांक 5 :- इस अंक का स्वामी बुध है। शुभ तिथि 5, 14 एवं 23 है। सोमवार, बुधवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ है। उसमें शुक्रवार सर्वाधिक शुभ है। सफेद, खाकी एवं हल्का हरा रंग इनके लिए शुभ है। इनके लिए अशुभ अंक 2, 6 और 9 है।
मूलांक 6 :- इस अंक का स्वामी शुक्र है। छह का अंक वैवाहिक जीवन, प्रेम एवं प्रेम-विवाह, आपसी संबंध, सहयोग, सहानुभूति, संगीत, कला, अभिनय एवं नृत्य का परिचायक है। शुभ तिथि माह की 6,15 एवं 24 तारीख है। मंगलवार, गुरुवार एवं शुक्रवार श्रेष्ठ दिन है जिसमें शुक्रवार सर्वश्रेष्ठ है। आसमानी, हल्का एवं गहरा नीला एवं गुलाबी रंग शुभ हैं। लाल एवं काले रंग का प्रयोग वर्जित है।
मूलांक 7 :- इस अंक का स्वामी केतु है। सात का अंक आपसी ताल मेल, साझेदारी, समझौता, अनुबंध, शान्ति, आपसी सामंजस्य एवं कटुता को जन्म देता है। महीना के 7, 16 एवं 25 तारीख सर्वश्रेष्ठ है। 21 जून से 25 जुलाई तक का समय भी श्रेष्ठ है। रविवार, सोमवार एवं बुधवार श्रेष्ठ हैं। जिसमें सोमवार सर्वश्रेष्ठ है। शुभ रंग हरा, सफेद एवं हल्का पीला है।
मूलांक 8 :- इस अंक का स्वामी शनि हैं। 8, 17 एवं 26 तारीख श्रेष्ठ तिथि हैं। शनि का अंक होने से इस अंक से क्षीणता, शारीरिक मानसिक एवं आर्थिक कमजोरी, क्षति, हानि, पूर्ननिर्माण, मृत्यु, दुःख, लुप्त हो जाना या बहिर्गमन हो जाता है, रविवार, सोमवार एवं शनिवार शुभ हैं। जिसमें शनिवार सर्वाधिक शुभ है। भूरा, गहरा नीला, बैगनी, सफेद एवं काला शुभ रंग है। हृदय एवं वायु रोग इनके प्रभाव क्षेत्र हैं। दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम एवं दक्षिण-पूर्व दिशा शुभ हैं।
मूलांक 9 :- अंक नौ का स्वामी मंगल है। इस मूलांक के लोगों पर मंगल ग्रह का प्रभाव सर्वाधिक है। यह अन्तिम ईकाई अंक होने से संघर्ष, युद्ध, क्रोध, ऊर्जा, साहस एवं तीव्रता देता है। इससे विभक्ति, रोष एवं उत्सुकता प्रकट होती है। इसका प्रतिनिधि मंगल ग्रह है जो युद्ध का देवता है 9, 18 एवं 27 श्रेष्ठ तारीख है। मंगलवार, गुरुवार एवं शुक्रवार शुभ दिन है। गहरा लाल एवं गुलाबी शुभ रंग है। पूर्व, उत्तर-पूर्व एवं उत्तर-पश्चिम दिशा अतिशुभ हैं। हनुमान जी की आराधना श्रेष्ठ है।

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