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क्या ज्योतिष के माध्यम से बदल सकती है मनुष्य की किस्मत

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भाग्य को मानने वालों को कर्म में विश्वास होना चाहिए क्योंकि भाग्य का रास्ता कर्म करने से ही खुलता है। किस्मत भी कर्म करने वाले लोगों पर ही मेहरबान होती है। मनुष्य की कामयाबी उसके कर्मों पर आधारित होती है, अगर कर्म बहुत अच्छे हों तो भाग्य को बदला जा सकता है। अगर हम भाग्य में लिखा मिलेगा मानकर कर्म न करें तो जीवन बहुत कठिन हो जाता है। स्वभाव से मनुष्य को कर्म करके भाग्य को अपनाना चाहिए। गीता के सार भगवान कृष्ण ने कहा  है :

"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन" -"तेरा अधिकार कर्मों में ही हैं; फलों में तो कभी नहीं ।"
श्री कृष्ण कहते हैं, कि हे मनुष्य! तेरा केवल कर्म करने में ही अधिकार है, कर्म के फलों में तेरा कोई हस्तक्षेप नहीं है!

भाग्य - 

भाग्य यह संकेत कर सकता है कि हमें कब कर्म की गति बढ़ानी है, कब, कैसे और क्या करना है। इन संकेतो को हम ज्योतिष के जरिये जान सकते हैं। ज्योतिष न केवल हमारे भविष्य के बारे में भविष्यवाणी करता है बल्कि कुछ हद तक मुश्किलों और बुरी किस्मत को दूर करने के लिए उपाय भी बताता है।  कभी-कभी जीवन में ऐसी परिस्थिति आती है जहां ज्योतिष हमारी किस्मत और भाग्य को आजमाने के उपाय और समाधान देकर एक प्रमुख भूमिका निभाता है। कई ज्योतिषीय सिद्धांत कई बार कठिनाइयों के दौरान प्रभावी रूप से कार्यरत हो सकते हैं जिससे किस्मत और भाग्य के पक्ष में व्यक्तियों को मान्यता मिलती है। ज्योतिषियों द्वारा प्रदान की गई अधिकांश उपाय बहुत प्राचीन सिद्धांतों पर आधारित होते हैं। 

ग्रहों की चाल और गति - 

आकाश मंडल में ग्रहों की चाल और गति का मानव जीवन पर सूक्ष्म प्रभाव पड़ता है। ग्रह और इनकी स्थिति ही व्यक्तियों को उनके कर्मों या कार्यों का फल देती है। इस प्रभाव का अध्ययन जिस विधि से किया जाता है उसे ज्योतिष कहते हैं। वेदों में ज्योतिष को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। जन्म कुंडली में बारह भाव नौ ग्रहों की दशा से प्रभावित होते हैं। सात मुख्य ग्रहों सूर्य, चन्द्रमा, बुध, शुक्र, मंगल, गुरू और शनि के साथ-साथ,  दो और ग्रहों राहु और केतु का भी कुंडली में ख़ास स्थान होता है। सूर्य सबसे चमकीला ग्रह है तथा चन्द्रमा उपग्रह है। इनके अलावा बाकी ग्रह शुक्र, बुध, मंगल, बृहस्पति और शनि हैं जबकि राहु और केतू को संवेदनशील या छाया ग्रह माना जाता है।, 

सात मुख्य ग्रह- 

1. सूर्य और इसकी स्थिति किसी व्यक्ति की पहचान पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव को दर्शाती है। सूर्य की स्थिति या इसका भाव हम पर विशेष प्रभाव डालता है और एक विशिष्ट व्यक्ति बनने में हमारी मदद करता है। 
2. चन्द्रमा और इसकी स्थिति व्यक्ति के भावनात्मक अनुभवों को दर्शाती है जो उसे मानसिक तौर पर प्रभावित करते हैं। 
3. मंगल और इसकी स्थिति व्यक्ति की विशेष आकर्षण के प्रति या विशिष्ट यौन प्राथमिकताओं के प्रति रुचि को दर्शाती है।
4. बुध और इसकी स्थिति व्यक्ति के मानसिक गुणों और उसके संचार के ढ़ंग को दर्शाती है। इसकी स्थिति व्यक्ति की रूचि और उसकी योग्यताओं को प्रकट करती है। 
5. बृहस्पति और इसकी स्थिति व्यक्ति के मनोभावों के बारे में भी बताती है। 
6. शुक्र और इसकी स्थिति प्यार के अनुभवों को दर्शाती है। साथ ही यह दर्शाती है कि किसी भी तरह का चुनाव करते समय व्यक्ति की मानसिक जरूरतें किस प्रकार की होंगी।
7. शनि की स्थिति ही व्यक्ति की राह में आने वाली कठिन चुनौतियों और सीमाओं को दर्शाती है।
8. राहु और केतु किसी व्यक्ति को किस तरह प्रभावित करेंगे ये उस व्यक्ति की कुंडली पर निर्भर करता है। कुंडली में जिस स्थान पर पर ये ग्रह बैठे होंगे और जिन भी ग्रहों की दृष्टि इन दोनों पर पड़ रही होगी उसी के अनुसार व्यक्ति के भाग्य पर प्रभाव पड़ेगा।

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