language
Hindi

विवाह के लिए कुंडली मिलान क्यों है ज़्यादा महत्वपूर्ण?

view2745 views
विवाह योग्य वर-कन्या के अभिभावक मात्र गुण मिलान को वरीयता देते हैं। उनका कुंडली मिलान से कोई सरोकार नहीं होता है। ये पूरी तरह हास्यपद बात होने के साथ ही उनके अल्पज्ञान का प्रदर्शन भी है। किंतु आप एक सामान्य इंसान से एस्ट्रोलॉजी के विशेष ज्ञान की आस भी कैसे लगा सकते हैं। होता ये है कि केवल गुण मिलान के कारण लाखों दाम्पत्य जीवन पूरी तरह बर्बाद हो जाते हैं।

क्या है वास्तविकता? 

हकीकत ये है कि गुण मिलान से केवल इतना पता चलता है कि अमुक वर-कन्या के बीच कितनी निभेगी, जिसमें वर्ग, गण, वश्य, नाड़ी भकूट, तथा योनि जैसे मुख्य संदर्भ बिंदु शामिल किए जाते हैं। किंतु इससे ये बिल्कुल नहीं जाना जा सकता है कि उन दोनों के बीच पूरे जीवन कैसा सामंजस्य रहेगा, साथ ही उनकी किस्मत कितनी दूरी तक एक साथ चलेगी। इसके अलावा मांगलिक दोष तथा सप्तम भाव की स्थिति सहित भाग्य व संतान भाव की स्थिति का भी अंदाज़ा नहीं लग पाता।

कुछ वर्ष पूर्व की बात है जब एक कन्या के पिता हमारे पास आए थे। उनके द्वारा प्रदत्त कुण्डली के आंकड़े पूरी तरह बयां कर रहे थे कि यदि उन्होंने चयनित वर से कन्या की शादी करा दी तो वह शादी अधिक से अधिक दो वर्ष तक चलेगी।

जब हमने उन्हें हकीकत से रूबरू करवाया तो उन्होंने कहा कि जो होगा देखा जाएगा आप केवल गुण मिलान कर दें। हमारे लाख मना करने के बावज़ूद उन्होंने अपने द्वारा चयनित लड़के से अपनी कन्या का विवाह करा दिया, परिणामस्वरूप आज दोनों का जीवन दुःखमय हो चुका है, तलाक का मामला न्यायालय में विचाराधीन है।

वस्तुतः गुण मिलान में तो दोनों की कुण्डली 26 गुणों से पास हो गई थी, किंतु दोनों के सप्तम भाव बुरी तरह प्रताड़ित थे।

वर की कुण्डली में सप्तमेश शनि मंगल के साथ द्वितीय भाव में विराजमान था। राहु व केतु लग्न व सप्तम में बैठे थे। जबकि कन्या की कुण्डली में सप्तमेश सूर्य द्वारा आच्छादित होकर अष्टम में बैठा था। यानि दोनों की कुण्डली बयां कर रही थी कि यदि उनमें विवाह संपन्न हो गया तो फिर तलाक निश्चित है।

क्या करना चाहिए ऐसी स्थिति में?

यहां पर उपयुक्त वर अथवा कन्या का चयन ऐसे करना चाहिए जिनकी कुण्डलियों में ठीक उसी रीति से ग्रह विराजित हों अथवा जिनके सप्तम भाव उतने ही पीड़ित हों, ताकि विपरीत राजयोग जैसी पोजीशन निर्मित हो जाए और बीज गणितीय रूल के अनुसार निगेटिव-निगेटिव, पॉजिटिव हो जाएं।
थोड़ा मुश्किल तो है ऐसे कुण्डलियों का मिलना किंतु असंभव नहीं। यदि वर अथवा कन्या के माता-पिता अपने प्रयास को थोड़ी और गति दे दें साथ ही महानुभाव ज्योतिषी महोदय अपनी सही राय दे दें तो तमाम दांपत्य जीवन संवर सकते हैं।
आपको यह आलेख कैसा लगा, अपनी टिप्पणी हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं
टिप्पणी