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मुख्य रत्न और उप रत्नों की सूची

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सूर्य से लेकर केतु तक नवग्रहों के लिए नौ मूल रत्न हैं - सूर्य के लिए माणिक, चंद्र का मोती, मंगल का मूंगा, बुध का पन्ना, गुरु का पुखराज, शुक्र का हीरा, शनि का नीलम, राहु का गोमेद एवं केतु का लहसुनिया।

समस्त पृथ्वी से मूल रूप से प्राप्त होने वाले मात्र रत्न 21 हैं। इन 21 रत्नों को नवग्रह में बांटा गया है। नवग्रह सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र एवं शनि ,राहु एवं केतु है और उसी हिसाब से हर ग्रह के तीन-तीन रत्न है। किन्तु राहु और केतु ग्रह की अपनी कोई स्वतन्त्र सत्ता न होने से इनकी गणना मूल ग्रहों में नहीं होती है और इन्हें छाया ग्रह कहा जाता है। इसलिए राहु और केतु को कोई रत्न प्राप्त नहीं है। गणना में 21 मूल रत्नों के अलावा इनके 21 उपरत्न भी हैं।

रत्नों की संख्या 21 तक ही सीमित है। इसके पीछे भी बहुत बड़ा कारण है। जिस प्रकार दैहिक, दैविक तथा भौतिक रूप से तीन तरह की व्याधियां तथा तीन प्रकार की उपलब्धियां होती हैं उसी प्रकार इंड़ा, पिंगला और सुषुम्ना तीन नाड़िया होती है। इसी प्रकार एक-एक ग्रह से उत्पन्न तीनों प्रकार की व्याधियों एवं उपलब्धियों को आत्मसात या परे करने के लिए एक-एक ग्रह को तीन-तीन रत्न प्राप्त हैं। रत्नों में मुख्यतः नौ ही रत्न ज़्यादा पहने जाते हैं ।

भारतीय ज्योतिष में मान्यता प्राप्त नवग्रहों के रत्न निम्नलिखित हैं :

1 माणिक्य रत्न

माणिक्य सूर्य ग्रह का रत्न है। माणिक्य को अंग्रेज़ी में 'रूबी' कहते हैं। यह रत्न ग्रहों के राजा माने जाने वाले सूर्य महाराज को बलवान बनाने के लिए पहना जाता है। यह गुलाबी की तरह गुलाबी सुर्ख श्याम वर्ण का एक बहुमूल्य रत्न है और यह काले रंग से लाल रंग तक का भी पाया जाता है। इसे सूर्य-रत्न की संज्ञा दी गई है। अरबी में इसको 'लाल बदख्शां' कहते हैं। यह कुरुंदम समूह का रत्न है। गुलाबी रंग का माणिक्य श्रेष्ठ माना गया है। धारक के लिए शुभ होने की स्थिति में यह रत्न उसे व्यवसाय में लाभ, प्रसिद्धि, रोगों से लड़ने शारीरिक क्षमता, मानसिक स्थिरता, राज-दरबार से लाभ तथा अन्य प्रकार के लाभ प्रदान कर सकता है। माणिक्य को आमतौर पर दायें हाथ की कनिष्का उंगली में धारण किया जाता है। इसे रविवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण करना चाहिए। धारक के लिए अशुभ होने की स्थिति में यह उसे अनेक प्रकार के नुकसान भी पहुंचा सकता है। 

2 पन्ना

पन्ना बुध ग्रह का रत्न है। पन्ना को अंग्रेज़ी में 'एमेराल्ड' कहते हैं। यह रत्न बुध ग्रह को बल प्रदान करने के लिए पहना जाता है। पन्ना हल्के हरे रंग से लेकर गहरे हरे रंग तक में कई रंगों में पाया जाता है। यह हरा रंग लिए सफ़ेद लोचदार या नीम की पत्ती जैसे रंग का पारदर्शक होता है। नवरत्न में पन्ना भी होता है। हरे रंग का पन्ना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। पन्ना अत्यंत नरम पत्थर होता है तथा अत्यंत मूल्यवान पत्थरों में से एक है। रंग, रूप, चमक, वजन, पारदर्शिता के अनुसार इसका मूल्य निर्धारित होता है। धारक के लिए शुभ होने पर यह उसे अच्छी वाणी, व्यापार, अच्छी सेहत, धन-धान्य तथा अन्य बहुत कुछ प्रदान कर सकता है। इस रत्न को आमतौर पर दायें हाथ की अनामिका उंगली में बुधवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण किया जाता है।

3 मोती 

मोती चन्द्र ग्रह का रत्न है। मोती को अंग्रेज़ी में 'पर्ल' कहते हैं। यह रत्न सब ग्रहों की माता माने जाने वाले ग्रह चन्द्रमा को बलवान बनाने के लिए पहना जाता है। मोती हल्के सफेद से लेकर हल्का पीला, हल्का नीला, हल्का गुलाबी,  काला, आसमानी,  लाल अथवा हल्का काला आदि कई रंगों में पाया जाता है। मोती समुद्र से सीपों के मुंह से प्राप्त होता है। मोती एक बहुमूल्य रत्न जो छूटा, गोल तथा सफ़ेद होता है। मोती को उर्दू में मरवारीद और संस्कृत में मुक्ता कहते हैं। ज्योतिष लाभ की दृष्टि से इनमें से सफेद रंग उत्तम होता है तथा उसके पश्चात हल्का नीला तथा हल्का नीला रंग भी माननीय है। धारक के लिए शुभ होने की स्थिति में यह उसे मानसिक शांति प्रदान करता है तथा विभिन्न प्रकार की सुख सुविधाएं भी प्रदान कर सकता है। मोती को आमतौर पर दायें हाथ की अनामिका या कनिष्का उंगली में धारण किया जाता है। इसे सोमवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण करना चाहिए।

4 लहसुनिया

लहसुनिया केतु ग्रह का रत्न है। यह रत्न केतु महाराज को बल प्रदान करने के लिए पहना जाता है। लहसुनिया रत्न में बिल्लीम की आँख की तरह का सूत होता है। इसमें पीलापन, स्याही या सफ़ेदी रंग की झाईं भी होती है। लहसुनिया रत्न को वैदूर्य भी कहा जाता है। धारक के लिए शुभ होने पर यह उसे व्यसायिक सफलता, आध्यातम प्रदान करता है।

5 पीला पुखराज

पुखराज गुरु ग्रह का रत्न है। पुखराज को अंग्रेज़ी में 'टोपाज' कह जाता हैं। पुखराज एक मूल्यवान रत्न है। पुखराज रत्न सभी रत्नों का राजा है। यह रत्न समस्त ग्रहों के गुरु माने जाने वाले बृहस्पति को बल प्रदान करने के लिए पहना जाता है। इसका रंग हल्के पीले से लेकर सफ़ेद, तथा नीले रंगों का होता है। वैसे कहावत है कि फूलों के जितने रंग होते हैं, पुखराज भी उतने ही रंग के पाए जाते हैं। पुखराज रत्न एल्युमिनियम और फ्लोरीन सहित सिलिकेट खनिज होता है। संस्कृत भाषा में पुखराज को पुष्पराग कहा जाता है। अमलतास के फूलों की तरह पीले रंग का पुखराज सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। धारक के लिए शुभ होने की स्थिति में यह उसे धन, विद्या, समृद्धि, अच्छा स्वास्थय तथा अन्य बहुत कुछ प्रदान कर सकता है। इस रत्न को आम तौर पर दायें हाथ की तर्जनी उंगली में गुरुवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण किया जाता है।

6 हीरा (सफेद पुखराज)

हीरा शुक्र ग्रह का रत्न है। अंग्रेज़ी में हीरा को 'डायमंड' कहते हैं। यह रत्न शुक्र को बलवान बनाने के लिए धारण किया जाता है। हीरा एक प्रकार का बहुमूल्य रत्न है जो बहुत चमकदार और बहुत कठोर होता है। यह भी कई रंगों में पाया जाता है, जैसे- सफ़ेद, पीला, गुलाबी, नीला, लाल, काला आदि। इसे नौ रत्नों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। हीरा रत्न अत्यन्त महंगा व दिखने में सुन्दर होता है। हीरे को हीरे के कणों के द्वारा पॉलिश करके ख़ूबसूरत बनाया जाता है। धारक के लिए शुभ होने पर यह उसे सांसरिक सुख-सुविधा, ऐशवर्य, मानसिक प्रसन्नता तथा अन्य बहुत कुछ प्रदान कर सकता है। इन रत्नों को आम तौर पर दायें हाथ की मध्यामा उंगली में शुक्रवार की सुबह स्नान करने के बाद धारण किया जाता है।

7 लाल मूंगा 

मूँगा मंगल ग्रह का रत्न है। मूँगा को अंग्रेज़ी में 'कोरल' कहा जाता है। यह रत्न मंगल को बल प्रदान करने के लिए पहना जाता है। मूंगा गहरे लाल से लेकर सिंदूर वर्ण, गुलाबी, सफ़ेद और कृष्ण वर्ण, हल्के लाल तथा सफेद रंग तक कई रगों में पाया जाता है किन्तु मंगल ग्रह को बल प्रदान करने के लिए गहरा लाल अथवा हल्का लाल मूंगा ही पहनना चाहिए। मूँगा का प्राप्ति स्थान समुद्र है। वास्तव में मूँगा एक किस्म की समुद्री जड़ है और मूँगा समुद्री जीवों के कठोर कंकालों से निर्मित एक प्रकार का निक्षेप है। मूँगा का दूसरा नाम प्रवाल भी है। इसे संस्कृत में विद्रुम और फ़ारसी में मरजां कहते हैं। धारक के लिए शुभ होने पर यह उसे शारीरिक तथा मानसिक बल, अच्छे दोस्त, धन तथा अन्य बहुत कुछ प्रदान कर सकता है। इस रत्न को आमतौर पर दायें हाथ की कनिष्का अथवा तर्जनी उंगली में मंगलवार को सुबह स्नान करने के बाद पहना जाता है।

8 नीलम

नीलम शनि ग्रह का रत्न है। नीलम का अंग्रेज़ी नाम 'सैफायर' है। शनि महाराज का यह रत्न नवग्रहों के समस्त रत्नों में सबसे अनोखा है। नीलम रत्न गहरे नीले और हल्के नीले रंग का होता है। यह ओर भी कई रंगों में पाया जाता है; मसलन- मोर की गर्दन जैसा, हल्का नीला, पीला आदि। मोर की गर्दन जैसे रंग वाला नीलम उत्तम श्रेणी का माना जाता है। नीलम पारदर्शी, चमकदार और लोचदार रत्न है। नवरत्न में नीलम भी होता है। शनि का रत्न नीलम एल्यूमीनियम और ऑक्सीजन के मेल से बनता है। इसे कुरुंदम समूह का रत्न माना जाता है। धारक के लिए शुभ होने की स्थिती में यह उसे धन, सुख, समृद्धि, नौकर-चाकर, व्यापरिक सफलता तथा अन्य बहुत कुछ प्रदान कर सकता है किन्तु धारक के लिए शुभ न होने की स्थिती में यह धारक का बहुत नुकसान भी कर सकता है। इसलिए इस रत्न को किसी अच्छे ज्योतिषि के परामर्श के बिना बिल्कुल भी धारण नहीं करना चाहिए। इस रत्न को आम तौर पर दायें हाध की मध्यमा उंगली में शनिवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण किया जाता है।

9 गोमेद

गोमेद राहु ग्रह का रत्न है। गोमेद का अंग्रेज़ी नाम 'जिरकॉन' है। यह रत्न राहु महाराज को बल प्रदान करने के लिए पहना जाता है। इसका रंग हल्के शहद रंग से लेकर गहरे शहद रंग तक होता है। सामान्यतः इसका रंग लाल धुएं के समान होता है। रक्त-श्याम और पीत आभायुक्त कत्थई रंग का गोमेद उत्त्म माना जाता है। नवरत्न में गोमेद भी होता है। गोमेद रत्न पारदर्शक होता है। गोमेद को संस्कृत में गोमेदक कहते हैं। धारक के लिए शुभ होने की स्थिति में यह उसे अक्समात ही कही से धन अथवा अन्य लाभ प्रदान कर सकता है। किन्तु धारक के लिए अशुभ होने की स्थिति में यह रत्न उसका बहुत अधिक नुकसान कर सकता है और धारक को अल्सर, कैंसर तथा अन्य कई प्रकार की बीमारियां भी प्रदान कर सकता है। इसलिए इस रत्न को किसी अच्छे ज्योतिष के परामर्श के बिना बिल्कुल भी धारण नहीं करना चाहिए। इस रत्न को आमतौर पर दायें हाथ की मध्यमा अथवा अनामिका उंगली में शनिवार को सुबह स्नान करने के बाद धारण किया जाता है।

उप रत्नों की सूची
1 अजूबा रत्न
2 कर्पिशमणि रत्न
3 गोमेद रत्न
4 ज़हर मोहरा रत्न
5 दाँतला रत्न
6 पनघन रत्न
7 बांसी रत्न
8 मूवेनजफ रत्न
9 लूधिया रत्न
10 संगेसिमाक रत्न
11 सूर्यकान्त रत्न
12 हरितमणि रत्न
13 एक्वामेरीन रत्न
14 गोदन्ती रत्न
15 जबरजद्द रत्न
16 तृणमणि रत्न
17 नीलोपल रत्न
18 बसरो रत्न
19 मूँगा रत्न
20 लास रत्न
21 संगिया रत्न
22 सुरमा रत्न
23 हजरते बेर रत्न
24 उदाऊ रत्न
25 गुदड़ी रत्न
26 जजेमानी रत्न
27 तुरसावा रत्न
28 नीलम रत्न
29 फ़ीरोज़ा रत्न
30 मासर मणि रत्न
31 लालड़ी रत्न
32 संगसितारा रत्न
33 सुनहला रत्न
34 हजरते ऊद रत्न
35 उपल रत्न
36 क्राइसोबेरिल रत्न
37 चुम्बक रत्न
38 तुरमली रत्न
39 नरम रत्न
40 फ़ाते ज़हर रत्न
41 माणिक्य रत्न
42 लहसुनिया रत्न
43 संगमूसा रत्न
44 सीजरी रत्न
45 हकीक रत्न
46 अलेमानी रत्न
47 कुरण्ड रत्न
48 चित्तों रत्न
49 तिलियर रत्न
50 धुनला रत्न
51 पाइरोप रत्न
52 माक्षिक रत्न
53 रातरतुआ रत्न
54 संगमरमर रत्न
55 सींगली रत्न
56 स्फटिक रत्न
57 अमलिया रत्न
58 कांसला रत्न
59 चन्द्रकांत रत्न
60 डूर रत्न
61 दुर्रेनजफ़ रत्न
62 पन्ना रत्न
63 मरगज रत्न
64 रक्ताश्म रत्न
65 शोभामणि रत्न
66 सिफरी रत्न
67 स्पाइनेल रत्न
68 अबरी रत्न
69 कसौटी रत्न
70 चकमक रत्न
71 टेढ़ी रत्न
72 दारचना रत्न
73 पुखराज रत्न
74 मकड़ी रत्न
75 रक्तमणि रत्न
76 शैलमणि रत्न
77 सिन्दूरिया रत्न
78 सोनामक्खी रत्न
79 हीरा रत्न
80 अहवा रत्न
81 कटैला रत्न
82 गौरी रत्न
83 झरना रत्न
84 दाने फिरग रत्न
85 पारस रत्न
86 बेरुंज रत्न
87 मोती रत्न
88 शेष मणि रत्न
89 संगेहदीद रत्न
90 सेलखड़ी रत्न
91 हरितोपल रत्न
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