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मनोकामना पूर्ति के लिए शिवरात्रि पर करें इन खास मंत्रों से पूजा

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शिव भक्तों के लिए शिवरात्रि एक बड़ा पर्व है, यूं तो हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि होती है, लेकिन फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की शिवरात्रि का विशेष महत्व है। इसलिए इसे मात्र शिवरात्रि ना कहकर ‘महाशिवरात्रि’ कहा जाता है।

इस वर्ष महाशिवरात्रि 13 फरवरी, 2018 को है। महाशिवरात्रि को किसी भी अन्य पर्व, व्रत एवं विधान से बढ़कर माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि सभी अन्य पर्व मिलकर भी महाशिवरात्रि की तुलना में कम ही हैं। यह पर्व सबसे बड़ा है, इस दिन किए गए व्रत और धार्मिक कार्य जरूर सफल होते हैं।

यदि किसी भक्त के मन में कोई इच्छा है और वह महाशिवरात्रि के दिन उसे पूर्ण करने के लिए पूरी श्रद्धा से भगवान भोले की आराधना करे, तो ऐसा माना जाता है कि उसकी वो इच्छा जरूर पूरी होती है।

यदि आप भी भगवान शंकर से कुछ मांगना चाहते हैं, अपने दिल की इच्छा को पूरा करना चाहते हैं तो इस शिवरात्रि निर्देशानुसार व्रत एवं पूजा करें। हम आपको महाशिवरात्रि के दिन किस तरह से पूजा करें एवं कौन से मंत्र का उच्चारण करें, इस बारे में जानकारी देने जा रहे हैं। 

महाशिवरात्रि का दिन सबसे पहले उन कन्याओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है जिनकी शादी नहीं हुई है। महाशिवरात्रि भगवान शिव एवं माता पार्वती के विवाह का दिन है, इसलिए विवाह से जुड़ी सभी इच्छाओं की पूर्ति के लिए इस दिन पूजा करना शुभ माना गया है।

यदि किसी कारणवश किसी कन्या का विवाह नहीं हो रहा हो, तो उसे महाशिवरात्रि का व्रत करना चाहिए। इस दिन व्रती को फल, पुष्प, चंदन, बिल्वपत्र, धतूरा, धूप, दीप और नैवेद्य से चारों प्रहर की पूजा करनी चाहिए। 

व्रती को दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अलग-अलग तथा सबको मिलाकर पंचामृत से शिव स्नान कराकर जल से अभिषेक करना चाहिए। चारों प्रहर के पूजन में शिव पंचाक्षर “ॐ नम: शिवाय” मंत्र का जाप करें। भव, शर्व, रुद्र, पशुपति, उग्र, महान, भीम और ईशान, इन आठ नामों से भगवान शिव को पुष्प अर्पित करें और उनकी आरती उतारकर परिक्रमा करें।

यदि आप भगवान शिव से अपनी इच्छानुसार वरदान चाहते हैं तो शिवरात्रि की पूजा के दौरान इस मंत्र का सही उच्चारण सहित जाप करें:  

ॐ ऐं ह्रीं शिव गौरीमव ह्रीं ऐं ॐ

घर में सुख-शांति एवं महिलाएं यदि सौभाग्य के लिए भोले शंकर से वरदान मांगना चाहती हैं तो भगवान शिव की पूजा करके दुग्ध की धारा से अभिषेक करते हुए इस मंत्र का उच्चारण करें - ॐ ह्रीं नम: शिवाय ह्रीं ॐ
यदि किसी कन्या की शादी में देरी हो रही है तो उसे इस शिव मंत्र के साथ माता पार्वती की भी इस मंत्र से उपासना करनी चाहिए – “हे गौरि शंकरार्धांगि यथा त्वं शंकरप्रिया”
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