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शिवरात्रि पर करें ‘शिव महामंत्र’ का जाप, महादेव स्वप्न में आकर पूरी करेंगे मुराद

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भगवान शिव से संबंधित अगर कोई बेहद शक्तिशाली एवं अद्भुत फल देने वाला मंत्र है तो वह है ‘महामृत्युंजय मंत्र’। इस मंत्र की शास्त्रों में बेहद महिमा है, कहते हैं इस मंत्र का जाप इंसान की हर मनोकामना पूरी कर सकता है। यह मंत्र व्यक्ति को मौत के मुंह से भी बाहर निकाल सकता है। 

शिवजी को प्रसन्न करना हो तो महामृत्युंजय मंत्र को अचूक माना जाता है। ऐसा माना जाता है नियमित तौर पर और सही संख्या में इस मंत्र का जाप किया जाए तो यह विभिन्न फल प्रदान कराता है। मंत्र इस प्रकार से है:
 
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

इसी बात को ध्यान में रखते हुए हम आपको बताएंगे कि आप महामृत्युंजय मंत्र का कितनी बार जाप करें, ताकि आपको भिन्न-भिन्न फलों की प्राप्ति हो। 

महामृत्युंजय मंत्र से जुड़ी यह जानकारी शिव पुराण में दर्ज है, जहां यह बताया गया है कि शिव से जुड़े विशेष दिन या वार जैसे कि प्रदोष, सोमवार, चतुर्दशी, महाशिवरात्रि या हर रोज भी महादेव के इस मंत्र का अलग-अलग रूप और संख्या में तन, मन और धन के साथ जप किया जाए तो यह हर सुख देने वाला बनता है।

शिव पुराण के अनुसार महामृत्युंजय मंत्र के एक लाख जप करने पर शरीर पवित्र हो जाता है।

अगर इस शक्तिशाली मंत्र के आप 2 लाख जप पूर्ण कर लें तो पूर्वजन्म की बातें याद आ जाती हैं।

महामृत्युंजय मंत्र के तीन लाख जप पूरे होने पर सभी मनचाही सुख-सुविधा और वस्तुएं मिल जाती है।

चार लाख जप पूरे होने पर भगवान शिव सपनों में दर्शन देते हैं और अगर पांच लाख महामृत्युंजय मंत्र जप पूरे हो जाएं तो भगवान शिव स्वयं ही प्रकट होकर अपने भक्त को दर्शन देते हैं और मुंह मांगी मुराद पूरी करते हैं। 

इतनी अधिक संख्या में महामृत्युंजय मंत्र को पूर्ण कर पाना असंभव तो लगता है लेकिन आस्था की कोई परिभाषा और निश्चित सीमा नहीं होती। यदि भक्त चाहे तो भगवान को प्रसन्न करने के लिए कुछ भी कर सकता है। 
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