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कालसर्प योग: जानिए क्या है हकीकत

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ज्योतिष में आजकल कालसर्प दोष को लेकर बेहद भ्रम की स्थिति है। कालसर्प दोष क्या है, जिसका इतना डर फ़ैला है कि आम जनता अपना बहुत सारा धन इस दोष को मिटाने के लिए खर्च करने को तैयार हो जाती है।

दैवज्ञ कहते हैं कि यदि इस दोष को कम करना है या इसका प्रभाव निर्मूल करना है, तो महान यज्ञ का संचालन करना पड़ेगा। यदि ऐसा नहीं किया गया तो महान अनर्थ होगा। अब ऐसे में आम जनता डरे नहीं तो क्या करे?

आइए समझते हैं कि कालसर्प दोष है क्या और कब कालसर्प दोष विपरीत राजयोग बन जाता है:   

वस्तुतः जब लग्न चक्र में सभी ग्रह राहु व केतु के दायरे में आ जाते हैं, तो महान कालसर्प का सृजन होता है। यह दोष सभी ग्रहों को निस्तेज कर उनके प्रभाव को सीमित कर देता है।

इसके कारण कुण्डली में मौज़ूद सभी प्रकार के राजयोग या सामान्य योग हल्के पड़ जाते हैं और मनुष्य मारा-मारा फिरने लगता है।

कालसर्प दोष की सबसे बड़ी समस्या ये है कि ये संबंधित जातक की पूरी लाइफ़ को निस्तेज बना देता है। इसके निवारण के लिए की जाने वाली सभी तरकीबें फेल हो जाती है। इसके साथ ही यदि जातक की दशा-अंतरदशा व साढ़े साती जैसी स्थितियां भी चलने लगें तो ऐसे में जातक तबाही की हालत में पहुंच जाता है।

विपरीत राजयोग का निर्माण भी करता है विपरीत कालसर्प योग 

यदि किसी इंसान की कुण्डली में राहु व केतु के मध्य सभी ग्रह हों, तो ये हानिप्रद कालसर्प दोष है। किंतु यदि केतु व राहु के मध्य सभी ग्रह आ रहे हों तो विपरीत कालसर्प दोष बनता है, जो कि एक महान राजयोग है। विपरीत कालसर्प योग की मौज़ूदगी में इंसान महान सुख प्राप्त करता है।

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