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विपरीत राजयोग की पहेली: कब और कैसे बनता है ऐसा महान योग

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आपको जानकर हैरत होगी कि “विपरीत राजयोग” ज्योतिष शास्त्र की सबसे मजेदार रोचक पहेली आज भी बनी हुई है।

जब भी किसी जातक की कुण्डली में कोई ग्रह नीचस्तंगत, बलहीन, शत्रुगृही, पापी व क्रूर ग्रहों द्वारा देखा जा रहा हो और उस ग्रह को किसी भी रूप में कोई शुभ ग्रह न देख रहे हों और न ही उसे किसी शुभ ग्रह की युति प्राप्त हो रही है साथ ही वह ग्रह शुभ कर्तरी में न हो तब ऐसी स्थिति में विपरीत राजयोगों का सृजन होता है।

यानि जब पूर्णरूपेण अशुभता प्राप्त ग्रह को किसी भी रूप में कहीं से भी शुभता न प्राप्त हो रही हो तो ऐसी स्थिति विपरीत राजयोग को जन्म देने वाली सिद्ध होती है। किंतु इस बात का मूल्यांकन बहुत कठिन है कि किसी जातक की कुण्डली में वाकई विपरीत राजयोग का सृजन हो रहा है अथवा नहीं!!

नक्षत्र विज्ञान का ज्ञान न रखने वाले कथित ज्योतिष विशेषज्ञों से आप इस बात की बिल्कुल उम्मीद नहीं कर सकते कि वे इसका सही फलादेश कर सकेंगे कि अमुक जातक की कुण्डली में विपरीत राजयोगों का वास्तविक रूप में सृजन हुआ अथवा नहीं। इसके लिए कई बिंदुओं पर एक साथ दृष्टि डालनी होती है, मसलन उस ग्रह विशेष की किस भाव में मौज़ूदगी है, उस पर कितने ग्रहों की कैसी दृष्टियां हैं, वह किस राशि में स्वयं बैठा हुआ है, उसकी अंशीय स्थिति कैसी है, इसके अलावा उस ग्रह को कहीं से भी बल तो नहीं मिल रहा है................

अब इतनी सारी गंभीर बातों पर किसी सामान्य सिलेब्रिटी ज्योतिर्विद् से नज़र डालने की अपेक्षा करना तो हास्यपद बात हो जाएगी क्योंकि उनका काम तो पल भर में निपटारे का होता है। ऐसे में वे किसी व्यक्ति विशेष पर अपना कीमती वक्त क्यूं जाया करेंगे?

ये तथ्य भी जान लीजिए कि यदि किसी जातक की कुण्डली में दो या दो से अधिक विपरीत राजयोग निर्मित हो रहे हों तो वह जातक अपने क्षेत्र में अत्याधिक ख्याति प्राप्त करता है। सामान्य रूप से इस तथ्य को ऐसे समझ सकते हैं कि अधिकांश राजनेताओं की कुण्डलियों में विपरीत राजयोगों की संख्या राजयोगों से अधिक होती है। विपरीत राजयोग, सामान्य राजयोगों से अधिक फलदायी तथा प्रभावशाली होते हैं बशर्ते वे वाकई किसी भी रूप में भंग न हो रहे हों।

हालांकि इस बात का पता लगा पाना वाकई ज्योतिष शास्त्र का सबसे रोचक व गूढ़ विषय है कि क्या किसी जातक की कुण्डली में निर्बाध रूप से विपरीत राजयोग सृजित हो रहा है अथवा कहीं न कहीं उस ग्रह विशेष को शुभता प्राप्त हो रही है और विपरीत राजयोग भंग हो रहा है।
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