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विवाह पश्चात अनैतिक रिश्ता क्यों? ज्योतिष परिचर्चा

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विवाह एक सामाजिक और नैतिक ज़िम्मेदारी है, जिसमें परस्पर दो इंसान ही नहीं वरन् दो परिवारों सहित एक बड़ा जन समुदाय शामिल होता है। ऐसे में शादी शुदा जोड़े से ये अपेक्षा की जाती है कि वे दोनों एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करेंगे और जीवन भर एक-दूसरे के लिए वफादार रहेंगे। किंतु समस्या तब होती है जबकि दोनों में से कोई एक अथवा दोनों ही अपने रिश्ते से बाहर जाकर शारीरिक या फिर भावनात्मक संबंध स्थापित करने में रुचि लेने लगते हैं। कई बार ऐसे रिश्ते दाम्पत्य में भारी कड़वाहट घोलने का काम करते हैं और विवाहित युगल कोआइए जानते हैं अनैतिक संबंधों की ग्रहीय-नक्षत्रीय व्याख्या क्या है:

 ध्यान रहे कि मंगल, राहु और शुक्र वासना को बढ़ाने में खास योगदान देते हैं। अगर किसी भी भाव में मंगल और शुक्र का युति योग बन रहा हो अथवा उसके बीच दृष्टि संबंध होता हो साथ ही राहु का भी उनके साथ संबंध बनता हो तो ऐसा जातक आजीवन अनैतिक संबंधों में लिप्त होता है। सप्तमेश और पंचमेश अथवा नवमेश का यदि आपसी संबंध कायम होता हो तो ऐसा जातक किसी न किसी रूप में अनैतिक रिश्ता बनाता ही है।

यदि ऐसे संबंध सातवें या फिर बारहवें भाव में बनते हों साथ ही शुक्र का संबंध चंद्र से भी स्थापित होता हो तो जातक की निकट संबंधियों से व्यभिचार का रिश्ता कायम हो जाता है।

कोई जातक कब किस तरह के अनैतिक रिश्ते में शामिल होगा, ये भी इन ग्रहों की परस्पर दशा-अंतर्दशा के तहत जाना जा सकता है.................. 

विवाह पश्चात अनैतिक रिश्तों पर गहरा शोध मौज़ूद है। कोई अनैतिक संबंध कब, किस वक्त जन्म लेगा, उस रिश्ते की लंबाई कितनी होगी, उससे होने वाली हानियां अथवा लाभ सहित जीवन में कितने अनैतिक रिश्ते कायम होंगे आदि का विस्तृत विवेचन किया जा सकता है।
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