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मां शैलपुत्री के पूजन की विधि

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नवरात्रि के पहले दिन मां के स्वरूप शैलपुत्री का पूजा की जाती है, यह मां पार्वती का ही अवतार है।

पौराणिक तथ्यों के अनुसार दक्ष के यज्ञ में भगवान शिव का अपमान होने के बाद सती योगाग्नि में भस्म हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने हिमालय के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया। पर्वत की पुत्री होने के कारण उन्हें शैलपुत्री कहा जाता है।

 

ऐसी मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिनों में विधि पूर्वक यदि देवी के सभी रूपों की अराधना की जाए, तो मनचाहा वर हासिल होता है। तो यदि आज आप मां शैलपुत्री के पूजन की तैयारी में लगे हैं तो उन्हें प्रसन्न करने के लिए मां को श्वेत वस्त्र एवं सफेद पुष्प ही अर्पित करें।

 

इसके अलावा चढ़ावे में कंद मूल मौसमी फलों का भोग भी लगा सकते हैं। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार मां के पूजन एक लिए विशेष मुहूर्त भी निकाला गया है।

मां की पूजा के दौरान आप मां के निम्नलिखित मंत्र का जाप भी कर सकते हैं:

"ॐ शैल पुत्रैय नमः"

कहते हैं कि मां शैलपुत्री की आराधना से मनोवांछित फल और कन्याओं को उत्तम वर की प्राप्ति होती है। साथ ही साधक को मूलाधार चक्र जाग्रत होने से प्राप्त होने वाली सिद्धियां हासिल होती हैं।

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