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कुंडली के ये योग बना सकते हैं आपको करोड़पति

Apr 30, 2018
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करोड़पति होने का सपना तो हर किसी को आता होगा लेकिन वो लोग चुनिंदा ही होते हैं जिनका ये सपना हकीकत बन जाता है। जनाब कोई करोड़पति यूं ही नहीं बना जाता, इसके लिए बहुत मेहनत भी करनी पड़ती है और जो लोग सफल होने की इस कूंजी को समझ जाते हैं अंत में उन्हीं के सपने साकार होते हैं।

लेकिन एक बात और है... करोड़पति बनने का अकूत धन-संपदा का मालिक बनने के लिए आपकी किस्मत या आपकी लग्न कुंडली भी बहुत बड़ी भूमिका निभाती है। हैरानी की बात तो ये है कि अगर आपकी कुंडली में धनवान बनने के योग मौजूद हैं तो करोड़पति बनने के अवसर आपके पास अपने आप ही चले जाएंगे। आपको इसके लिए ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ेगी।

ज्योतिष विद्या के अनुसार कुछ ऐसे अद्भुत योग हमारी कुंडली में मौजूद होते हैं जो हमें करोड़पति बना सकते हैं। अब वो कौनसे योग हैं, चलिए जानते हैं।

जिस जातक की कुंडली में मंगल चौथे, सूर्य पांचवें और गुरु ग्यारहवें या पांचवें भाव में होता है तो उस व्यक्ति को पैतृक संपत्ति हाथ लगती है। उन्हें कृषि या संपत्ति से अकूत संपत्ति हाथ लगती है।

दूसरा योग तब बनता है जब ग्यारहवें या दसवें भाव में सूर्य, चौथे और पांचवें भाव में मंगल हो या ग्रह इसके विपरीत स्थिति में हों तो व्यक्ति प्रशासनिक सेवाओं के जरिए धन-संपदा का मालिक बनता है।

जब बृहस्पति कर्क, धनु या मीन राशि का हो तो और साथ की पांचवें भाव का स्वामी होकर दसवें भाव में  बैठा हो तो ऐसे व्यक्ति को अपनी पुत्री या पुत्र के जरिए अपार धन-संपदा मिलती है।

जिस जातक की कुंडली में शनि, बुध और शुक्र एक साथ एक भाव में होते हैं उस व्यक्ति को व्यापार में उन्नति मिलती है और वह अपार संपत्ति बना लेता है।

कुंडली में दसवें भाव का स्वामी वृषभ या तुला राशि में मौजूद हों और शुक्र या सातवें भाव का स्वामी दसवें भाव में हो तो व्यक्ति विवाह के बाद अपने साथी की कमाई से धनवान बनता है।

कुंडली में अगर शनि जब तुला, मकर या कुंभ राशि में होता है, तब अकाउंटेंट बनकर धन अपार धन अर्जित करता है।

कुंडली में बुध, शुक्र और बृहस्पति ग्रह अगर किसी एक भाव में साथ बैठे हों तो ऐसा व्यक्ति अपने धार्मिक कार्यों के जरिए धन अर्जित करता है। जिनमें पुरोहित, पंडित, ज्योतिष, कथाकार और धर्म संस्था का प्रमुख बनकर धनवान हो जाता है।

किसी जातक की कुंडली के त्रिकोण भावों या केन्द्र में यदि गुरु, शुक्र, चंद्र और बुध ग्रह बैठे हों या फिर तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव में सूर्य, राहु, शनि, मंगल आदि ग्रह बैठे हो तब व्यक्ति राहु, शनि, शुक्र या बुध की दशा में असीमित धन-संपत्ति प्राप्त करता है।

कुंडली के सातवें भाव में मंगल या शनि बैठे हों और ग्यारहवें भाव में केतु के अलावा कोई अन्य ग्रह बैठा हो, तब व्यक्ति व्यापार-व्यवसाय के जरिए अतुलनीय धन प्राप्त करता है। यदि केतु ग्यारहवें भाव में बैठा हो तब व्यक्ति विदेशी व्यापार से धन प्राप्त करता है।

कुंडली के सातवें भाव में मंगल या शनि मौजूद हों और ग्यारहवें भाव में शनि, मंगल या राहु बैठा हो तो व्यक्ति शेयर मार्केट या जुए की सहायता से धन प्राप्त करता है।

 

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