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अक्षय तृतीया: अवश्य करें इनमें कोई भी एक काम, चमकेगी किस्मत

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हिंदू पंचांग के अनुसार पूरे दिन में बारह प्रहर होते हैं जिसमें नक्षत्रों तथा ग्रहों की स्थिति देखकर उसकी शुभता या अशुभ कालों का आंकलन किया जाता है। किंतु बैसाख माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का हर प्रहर और काल शुभ संयोगों का होता है, इसीलिए इस दिन को अक्षय तृतीया कहा जाता है अर्थात वह तृतीया तिथि जिसमें शुभ फलों का कभी क्षय नहीं होता।


मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु के अवतार परशुराम का भी जन्म हुआ था, इसलिए कई जगहों पर अक्षय तृतीया को ‘परशुराम जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य हमेशा अच्छा फल देते है और दान-पुण्य के कर्म करने पर मनुष्य को सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है।


‘सर्वार्थ सिद्धि योग’ होने के कारण अक्षय तृतीया की तिथि को अक्षय (कभी खत्म ना होने वाला)’ फल देने वाला माना जाता है, इसलिए इस दिन भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की पूजा की भी विशेष मान्यता है। यही वजह है कि आर्थिक संपन्नता और सुख-समृद्धि के लिए इस दिन लोग विशेष रूप से सोने की खरीदारी करते हैं, बिजनेस की शुरुआत या नए घर में प्रवेश करते हैं। शास्त्रों के अनुसार इनके अलावा भी कुछ ऐसे कार्य हैं जो इस दिन अवश्य करन चाहिए। आगे हम इसकी जानकारी दे रहे हैं:


जल का दान अवश्य करें

जल को ‘सम्मान’ तथा ‘लक्ष्मी’ का प्रतीक, अक्षय स्रोत और जीवनदायिनी माना गया है। इसलिए जल का दान सबसे पुण्य के कार्यों में एक समझा जाता है। अक्षय तृतीया के दिन किसी भी समय ‘जल’ का दान अवश्य करें। ऐसे जातकों को जीवन में धन की हर कमी पूरी होती है और वह संपन्नतापूर्वक पूरा जीवन जीता है।


इसके अतिरिक्त कलह दूर कर खुशहाली की प्राप्ति हेतु बिस्तर का दान करें, अपनी लंबी के लिए वस्त्र तथा पति की लंबी उम्र के लिए कुमकुम का दान करें।

इसी प्रकार दुर्घटनाओं से बचने के लिए चंदन का दान अवश्य करें तथा जीवन की नारकीय यातना या असीम कष्टों से मुक्ति के लिए नारियल अथवा पादुका का दान करें।


पितरों का तर्पण तथा पिंड दान

किसी भी परिवार और उसके वंशजों की खुशहाली-वृद्धि में पितरों का आशीर्वाद या उनकी असंतुष्टि बहुत अधिक प्रभावित करती है। इसलिए अक्षय तृतीया के दिन पितरों का तर्पण अवश्य करें, अगर पिंडदान संभव हो तो वह भी करें।


भौतिक सुखों की प्राप्ति हेतु

जीवन में परेशानियों से मुक्ति तथा भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए इस दिन भगवान विष्णु की पूजा अवश्य करें। पूजा में उन्हें विशेष रूप से गन्ने के रस से बना भोग चढ़ाना चाहिए। शिव पुराण के अनुसार इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में कमल पुष्पों के साथ भगवान विष्णु की पूजा करने वालों को जीवन में यश और कीत्रि की प्राप्ति होती है।


पति-पत्नी को वैवाहिक जीवन में खुशहाली के लिए भगवान विष्णु तथा लक्ष्मी की विधिवत पूजा करनी चाहिए।


गंगा स्नान

पापों से मुक्ति तथा पुण्य फलों की प्राप्ति के लिए इस दिन गंगा स्नान का भी विशेष महत्व है।


ज्योतिष शास्त्र

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन भवान विष्णु, मां ल्क्ष्मी की पूजा के अलावा किसी भी प्रकार के दान का कई गुना फल मिलता है किंतु ‘सत्तू’ या ‘गुड़’ का दान व्यक्ति के लिए हर प्रकार से लाभकारी होता है तथा उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।


इस दिन मौन व्रत रखना भी व्यक्ति को जीवन में सभी प्रकार के कलह से मुक्ति दिलाता है।


विशेष पूजा

ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजाघर या घर के किसी भी कोने में साफ जल से भरा मिट्टी का कलश स्थापित करते हुए उसके ऊपर नारियल रखें। इसके पश्चात् भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी का ध्यान करते हुए धूप-दीप, नैवेद्य, केले तथा आम से उनकी पूजा करें। पूजा के पश्चात् विष्णु सहस्रनाम का पाठ अवश्य करें।



 

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