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क्यों हुए “चाचा चौधरी

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जी हां, हम बात कर रहे हैं कार्टूनिस्ट प्राण की। चाचा चौधरी और साबू के चर्चित कार्टून के जरिए घर-घर में लोकप्रिय हुए कार्टूनिस्ट प्राण 5 अगस्त, 2014 को हमारे बीच नहीं रहे। वे पिछले कुछ सालों से कैंसर से पीड़ित थे और आखिरकार 5 अगस्त, 2014 को उन्होंने अंतिम सांस ली। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे। भले ही अब वो हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके द्वारा रचित किरदारों के माध्यम से वो हमेशा हमारे बीच जीवित रहेंगे।

यद्यपि प्राण शर्मा जी ने कई किरदारों को जन्म दिया लेकिन उनमें से सर्वाधिक लोकप्रिय हुआ "चाचा चौधरी" का किरदार। आखिर ऐसा क्यों हुआ, आइए जानते हैं!!

प्राण कुमार शर्मा का जन्म 15 अगस्त, 1938 को हुआ था। अत: उनका मूलांक 6 और भाग्यांक 8 था। सबसे विशेष बात ये है कि इनके मूलांक 6 और भाग्यांक 8 आपस में मित्र हैं। उनकी जन्म तारीख में अंक हैं: 15-08-1938 यानी

1,5,8,1,9,3,8 जहां 1 और 8 अंक की 2 बार पुनरावृत्ति हुई है जबकि 5,9 और 3 एक-एक बार हैं। यानी इनकी जन्म तारीख में सूर्य, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि का प्रभाव है, जिस पर सूर्य और शनि का सर्वाधिक प्रभाव है।

स्वाभाविक है इन पर सर्वाधिक प्रभाव 1 और 8 अंक का रहा है अत: जिस पात्र या कॉमिक्स के नाम की वैल्यू 1 या 8 होगी, उसके सफल होने की अधिक उम्मीद रहेगी। यद्यपि ये दोनों आपस में शत्रु अंक हैं लेकिन जो भी हो प्रभाव तो इन्हीं अंकों का पड़ना है। 1 अंक का स्वामी होता है सूर्य जो कि प्रसिद्धि का कारक ग्रह है। अत: 8 की तुलना में 1 का अंक अधिक प्रसिद्धि दिलाएगा। आइए देखते हैं कि प्राण जी के द्वारा सृजित किए गए सभी किरदारों के बारे में अंक ज्योतिषीय विश्लेषण क्या इशारा कर रहा है? इसके साथ ही यह भी जानते हैं कि चाचा चौधरी क्यों इतने

प्रसिद्ध हुए? तथा अन्य नामों में किस अंक या ग्रह का असर कम रहा, जिसके कारण उन किरदारों को उतनी प्रसिद्धि नहीं मिल पाई।

Chacha Chaudhary नामांक 1

Shrimatiji नामांक 5

Pinki नामांक 8

Billoo नामांक 5

Raman नामांक 4

Channi Chachi नामांक 2

यहां पर हमने पाया कि नामांक 1 वाला केवल एक किरदार है वो है "चाचा चौधरी" जबकि नामांक 8 वाला किरदार है "पिंकी"। जैसा कि मैंने पहले ही कहा कि 8 अंक अपेक्षाकृत कम प्रसिद्धि देगा। यानी कि इन्हीं दोनों में से किसी एक को सबसे प्रसिद्ध किरदार होना चाहिए। जैसा कि सब जानते हैं कि "चाचा चौधरी" इनमें से सर्वाधिक प्रसिद्ध है। पिंकी और बिल्लू का नम्बर इसके बाद आता है लेकिन "चाचा चौधरी" ने बाजी मारी तो कैसे? आइए थोड़ा और विस्तार से जानते हैं:

Chacha Chaudhary =

c h a c h a c h a u d h a r y

3 5 1 3 5 1 3 5 1 6 4 5 1 2 1

यहां पर हमने देखा कि 1का अंक 5 बार है यानी कि Chacha Chaudhary का न केवल नामांक 1 है बल्कि इसमें 1 के अंक का प्रभाव भी सर्वाधिक है। अब ये देख लिया जाय कि इसमें अंक 1 के शत्रु अंक कितनी बार हैं। अंक 1 के शत्रु अंक 4,6,7 और 8हैं। इनमें से Chacha Chaudhary में केवल 6 का अंक आया है और वो भी एक बार। अत: इससे अंक 1 को अधिक फ़र्क नहीं पड़ेगा। आइए अब पिंकी को देख लेते हैं:

Pinki =

p i n k i

8 1 5 2 1

पिंकी का नामांक 8 है और इस विश्लेषण में 8 एक बार आया है वहीं उसका मित्र अंक 5 भी एक बार आया है। जबकि शत्रु अंक 1 और 2 में से 1 की पुनरावृत्ति दो बार हुई है, जबकि 2 एक बार आया है। यहां हमने देखा की Pinki नाम में शत्रु अंकों की अधिकता है अत: रेस में पिंकी पीछे रह गई और चाचा चौधरी आगे निकल गए।

यानी कि अंकों और ग्रहों के प्रभाव ने "चाचा चौधरी" नामक काल्पनिक किरदार को अमर बना दिया। आज "प्राण" साहब भले हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उन्होंने इन किरदारों में जो प्राण फूंके हैं वो तो अमर हैं और इन किरदारों के जरिए प्राण साहब भी हमारे बीच अमर रहेंगे।

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