language
Hindi

लेख

क्या अशुद्ध उच्चारण से मंत्र हानिकारक प्रभाव देते हैं?
मंत्र, शब्दों का संचय है जो इष्ट को प्राप्त करने और अनिष्ट बाधाओं को दूर करने का मार्ग है। मंत्र शब्द में ‘मन’ का तात्पर्य मन और मनन से है और ‘त्र’ का तात्पर्य शक्ति और रक्षा से है । मंत्र जप से व्यक्ति को पूरे ब्रह्मांड की एकरूपता का ज्ञान प्राप्त होता है। मन का लय हो जाता है और मन भी शांत हो जाता है। मंत्रजप के अनेक लाभ हैं- आध्यात्मिक प्रगति, शत्रु का विनाश, अलौकिक शक्ति पाना, पाप नष्ट होना और वाणी की शुद्धि आदि। ये सभी लाभ तभी प्राप्त हो सकते हैं जब व्यक्ति इनका उच्चारण ठीक प्रकार से करे।
/ प्रस्तुति : ओम प्रकाश
शुभ ग्रहों का मारकेशत्व क्रूर और पापी ग्रहों से अधिक कब होता है?
किसी भी व्यक्ति की कुण्डली के बारह भावों में बारह राशियों सहित नौ ग्रह विद्यमान होते हैं। सात मुख्य ग्रहों के साथ ही दो छाया ग्रहों, राहु व केतु की व्यक्ति के जीवन में महती भूमिका होती है।
Planets
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
जानिए कैसे होते हैं अक्टूबर के महीने में जन्मे लोग
अक्टूबर माह में जन्में लोगों को दौलत-शौहरत, हर चीज इनके कदम चूमती है लेकिन इन्हें कभी भी घमंड नहीं होता।
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
रावण संहिता से फल कथन
ज्योतिष या गूढ़ विज्ञान की मणि को "रावण संहिता" जाता है। "रावण संहिता" को एक ज्योतिषीय मणि माना जाता है जो ग्रहों के तरीकों का अनुमान लगाने के तरीके बताती है और भविष्य में होने वाली तबाही और आपदाओं की भविष्यवाणी करने की कोशिश करता है। रावण संहिता ज्योतिषीय विद्या का एक ग्रंथ का संग्रह है जिससे मुख्य रूप से किसी व्यक्ति के भविष्य की भविष्यवाणी की जा सकती है।
Rituals and Puja
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
जब शनि ही बनाए शक्तिशाली मारक योग
ज्योतिष के कुछ नियम बेहद जटिल तरीके के मसलों पर सटीकता से प्रकाश डालते हैं। इनमें से एक नियम है शनि का मारकत्व कब और किस स्थिति में अत्याधिक प्रभावी हो जाता है। आज हम शनि के मारकत्व के संदर्भ में उदाहरण सहित चर्चा करेंगे। ध्यान रहे कि तुला और वृष लग्नों को छोड़कर अन्य 10 लग्नों में शनि के किसी न किसी रूप में मारकेश बनने की संभावना बनी रहती है। किंतु यदि किसी जातक की जन्म कुंडली में शनि द्वितीय, द्वादश, सप्तम भावों का स्वामी होकर किसी भी मारक स्थान पर विराजमान भी हो जाए तो ऐसी अवस्था में शनि के मारकेशत्व में अत्याधिक बढ़ोत्तरी हो जाती है। इसके अतिरिक्त यदि शनि का किसी भी अन्य मारकेश बनने वाले ग्रह से सीधा संपर्क हो जाए तो ऐसे मामले में शनि स्वयं ही मारकेश बन जाता है।
Kundli Dasha
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
पाराशरी सिद्धांत क्या है?
लघुपाराशरी एक ऐसा ग्रन्थ है जिसके बिना फलित ज्योतिष का ज्ञान अधूरा है। पाराशरी सिद्धांतों का लघुपाराशरी में वर्णन किया गया है। संस्कृत श्लोकों में रचित लघु ग्रन्थ लघुपाराशरी में फलित ज्योतिष संबंधी सिद्धांतों का वर्णन है और ये 42 सूत्रों के माध्यम से वर्णित है। एक-एक सूत्र अपने आप में अमूल्य है, इसे 'जातकचन्द्रिका' "उडुदाय प्रदीप" भी कहा जाता है। यह विंशोत्तरी दशा पद्धति का महत्वपूर्ण ग्रन्थ है तथा वृहद् पाराशर होराशास्त्र पर आधारित है। फलित ज्योतिष विद्या के महासागर रुपी ज्ञान को अर्जित करने के लिए पाराशर सिद्धांतों पर आधारित लघुपाराशरी एक बहुमूल्य साधन सिद्ध हो सकती है। इस पुस्तक का कोई एक लेखक नहीं है। यह पुस्तक पाराशरी सिद्धांत को मानने वाले महर्षि पाराशर, उनके अनुयायियों, प्रकांड विद्वानों द्वारा सामूहिक रूप से सम्पादित है।
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक लेख
नौ ग्रह के वैदिक, पौराणिक और बीज मंत्र
कुंडली में स्थित नौ ग्रहों का प्रभाव व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवन पर पड़ता है। जन्म कुंडली के 12 घरों में स्थित नौ ग्रहों की दशा का असर जीवन पर होता ही है। नवग्रह पूजन से नवग्रहों के बुरे असर को कम किया जा सकता है। वर्षों से नवग्रहों की शांति के लिए देव पूजन किया जाता रहा है। पूजन के लिए जरुरी होते हैं - मंत्र। शास्त्रों में नवग्रह शांति के कई मंत्र दिए हैं। वैदिक मंत्र, बीज मंत्र और भी कई मंत्र है जिनका जप ग्रहों की प्रसन्नता के लिए किया जाता है। ये मंत्र बोलने में कठिन होते हैं जिसके कारण हर किसी के लिए इनका जप आसान नहीं होता। मंत्रों को गलत बोलने से उसका सही फल नहीं मिलता है।
Planets
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
रत्न धारण में कौन सी सावधानियां रखें
हर मनुष्य की जन्मपत्री में ग्रहों की कमजोर और बलवान दशा के अनुसार ही मनुष्य के भाग्य में परिवर्तन आता रहता है। अशुभ ग्रहों को शुभ बनाना या शुभ ग्रहों को और अधिक शुभ बनाने की मनुष्य की सर्वदा चेष्टा रही है जिसके लिए वो अनेक उपाय करता है जैसे मंत्र जाप, दान, औषधि स्नान, रत्न धारण, धातु एवं यंत्र धारण, देव दर्शन आदि। रत्न धारण एक महत्वपूर्ण एवं असरदार उपाय है।
Gemstone
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
त्रिक, आपोक्लिम,त्रि कोण, केन्द्र, पणफर उपचय भावों की विशेषता
जन्मकुंडली के 12 भावों की अपनी अपनी विशेषताएं हैं। किंतु ये जानना रोचक होगा कि कुछ भाव विशेष किन नामों से जाने जाते हैं और उनका फल क्या होता है। भावों की विशिष्ट संज्ञाए : जन्म कुंडली में विभिन्न भावों की विभिन्न संज्ञाए होती हैं जो इस प्रकार हैं:
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
रावण संहिता के कुछ उपाय
भारतीय कहानियों में रावण को प्रकांड पंडित और समस्त शास्त्रों का जानकार बताया गया है। रावण भगवान शिव का परम भक्त होने के साथ ही महान तांत्रिक और ज्योतिषी भी था। रावण ने खगोलविज्ञान और ज्योतिष विज्ञान में महारथ हासिल की थी। रावण तंत्र, मंत्र विद्या का भी धनी था। रावण संहिता में संरक्षित रावण के सिद्धांतों को आज भी स्वीकारा जाता है। रावण ने कई विषयों पर अनेकों किताबों की रचना की थी। इन्हीं में एक है रावण संहिता। रावण की तंत्र विद्या और ज्योतिष का सार रावण संहिता में मिलता है। रावण संहिता में भविष्य को जानने के कई ज्योतिषीय रहस्य हैं।
Rituals and Puja
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
राहु काल: विघ्न-बाधाओं को आमंत्रण देता है यह अनिष्ट काल
राहु के प्रकोप को हममें से अधिकांश लोगों ने अपनी और दूसरे की लाइफ़ में ज़रूर देखा-सुना होगा। बुद्धि-विवेक नाशक इस छाया ग्रह का प्रभाव जीवन पर सर्वाधिक पड़ता है। जिसकी भी महादशा-अंतर्दशा राहु की चलती है या फिर जब भी युति व दृष्टि द्वारा ये कुण्डली के किसी स्थान और ग्रह को प्रभावित करता है, उस दौरान इंसान के अपने ही उसके शत्रु हो जाते हैं, द्वादश बैठा राहु जेलयात्रा तक करवाने की ताकत रखता है। सबसे बुरी बात राहु के साथ ये है कि अनायास कार्य करवाता है यानि जिसकी आपको उम्मीद भी न हो, वैसे परिणाम दिलाने में इसकी ताकत लगती है। अगर कुण्डली में राहु बुरे भावों में बैठा हो साथ ही कमज़ोर व पीड़ित हो, व्यक्ति साढ़े साती के फ़ेज़ में हो तब तो अनिष्टकारी रिजल्ट ही मिलता है।
Planets
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
ज्योतिष के मुख्य ग्रंथों की सूची
भारत में विकसित ज्योतिष प्रणाली के आधार पर लिखे प्राचीन काल के ज्योतिषगणना संबंधी कुछ ग्रंथ ऐसे हैं जिनके लेखकों ने अपने नाम नहीं दिए हैं। ऐसे ग्रंथ हैं वेदांग ज्योतिष (काल ई पू 1200); पंचसिद्धांतिका में वर्णित पाँच ज्योतिष सिद्धांत ग्रंथ। कुछ ऐसे भी ज्योतिष ग्रंथकार हुए हैं जिनके वाक्य अर्वाचीन ग्रंथों में उद्धृत हैं किंतु उनके ग्रंथ नहीं मिलते। उनमें मुख्य हैं नारद, गर्ग, पराशर, लाट, विजयानंदि, श्रीषेण, विष्णुचंद आदि। अलबेरूनी के लेख के आधार पर लाट ने मूल सूर्यसिद्धांत के आधार पर इसी नाम के एक ग्रंथ की रचना की है। श्रीषेण के मूल वसिष्ठ सिद्धांत के आधार पर वसिष्ठ-सिद्धांत लिखा। ये सब ज्योतिषी ब्रह्मगुप्त (शक संवत् 520) से पूर्व हुए है। श्रीषेण आर्यभट के बाद तथा ब्रह्मगुप्त से पूर्व हुए हैं। कुछ ऐसे भी ग्रंथ है जिनके बिना ज्योतिष भविष्यवाणी करना लगभग असंभव है।
/ प्रस्तुति : ओम प्रकाश
13 जनवरी को मकर राशि में प्रवेश करेंगे शुक्र, जानिए प्रभाव
आगामी 13 जनवरी, 2018 को प्रेम, रोमांस और विलासिता और वैभव से संबंधित शुक्र ग्रह धनु से मकर राशि में गोचर करने जा रहा है। यह ग्रह प्रेम संबंधों, विवाहित जीवन और जीवन में विलासिता को प्रभावित करने वाला है, ऐसी स्थिति में जाहिर तौर पर यह मकर के साथ-साथ सौरमंडल की अन्य सभी राशियों पर भी असर जरूर दिखाएगा।
Planets
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
क्यों हुए “चाचा चौधरी
प्राण कुमार शर्मा यानी चाचा चौधरी, श्रीमती, पिंकी, बिल्लू, रमन और चन्नी चाची जैसे कार्टूनों के जन्मदाता प्राण।
/ प्रस्तुति : पंडित हनुमान मिश्रा
असफलता और भय देता है कुंडली में ग्रहण योग, जानिए उपाय
ज्योतिषविज्ञान में कुछ ऐसे महत्वपूर्ण शुभ और अशुभ योगों का उल्लेख है, जो यदि किसी जातक की जन्मकुण्डली में बनते हों तो उनका उस जातक विशेष के भाग्य पर गहरा प्रभाव होता है। ऐसे शुभ अथवा अशुभ योगों के प्रभाव के कारण व्यक्ति विशेष का जीवन या तो खुशहाली से भर जाता है अथवा वह संकटों से मारा मारा फिरता है। कालसर्प दोष, शकट योग, गजकेसरी योग, विषकन्या योग आदि बुरे प्रभावों से ओत-प्रोत योग हैं जो इंसान की जिंदगी को दूभर कर देते हैं। इन्हीं बुरे प्रभाव वाले योगों की भांति ग्रहण योग भी होता है। इस ग्रहण का भी इंसानी जीवन पर गहरा असर है। आज हम ग्रहण योग का जीवन पर होने वाले असर के बारे में चर्चा करेंगे।
Health
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
विपरीत राजयोग की पहेली: कब और कैसे बनता है ऐसा महान योग
आपको जानकर हैरत होगी कि “विपरीत राजयोग” ज्योतिष शास्त्र की सबसे मजेदार रोचक पहेली आज भी बनी हुई है। जब भी किसी जातक की कुण्डली में कोई ग्रह नीचस्तंगत, बलहीन, शत्रुगृही, पापी व क्रूर ग्रहों द्वारा देखा जा रहा हो और उस ग्रह को किसी भी रूप में कोई शुभ ग्रह न देख रहे हों और न ही उसे किसी शुभ ग्रह की युति प्राप्त हो रही है साथ ही वह ग्रह शुभ कर्तरी में न हो तब ऐसी स्थिति में विपरीत राजयोगों का सृजन होता है।
Success
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
ज्योतिष के चुने हुए अशुभ योग
ज्योतिष शास्त्र से लोगों के भूतकाल से लेकर भविष्य तक को जाना जा सकता है। भविष्यवाणी करने के समय मुख्य पांचों तत्वों (आकाश, जल, पृथ्वी,अग्रि व वायु) के साथ ही नक्षत्र और राशियों को ध्यान में रखा जाता है। भविष्यवाणी करने के लिए कुंडली में लग्न सबसे प्रभावी होता है। ज्योतिष शास्त्र की पराशर से लेकर जैमिनि पद्धतियों ने ग्रहों के योगों को ज्योतिष फलादेश का आधार माना है। योग के आंकलन के बिना सही फलादेश कर पाना संभव नहीं है।
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक लेख
रत्न कैसे कार्य करते हैं?
कुछ पत्थर या पदार्थों में कुछ विशेष गुण, चरित्र एवं विशेषताएँ होने के कारण उन्हें रत्न कहा जाता है जैसे-हीरा, माणिक्य, वैदूर्य, नीलम, पुखराज, पन्ना आदि को लोग रत्न के नाम से पुकारते हैं। वास्तव में ये सारे पत्थर ही हैं, लेकिन बेशक़ीमती पत्थर इसलिए इन्हें प्रिसियस स्टोन (बहुमूल्य पत्थर) भी कहते हैं। 'रत्न' का विशेष अर्थ श्रेष्ठत्व भी है।
Gemstone
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
इस शनि अमावस्या पर पाएं दुर्भाग्य से हमेशा के लिए मुक्ति
एस्ट्रोस्पीक आपके लिए शनि अमावस्या के अवसर पर शनि देव को प्रसन्न करने का एक बेहतरीन अवसर लेकर आया है।
Kundli Dasha
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
कितना खतरनाक है विषकन्या योग, जानिए
ज्योतिष शास्त्र में पूर्वजन्म कृत फलों का स्पष्ट विवरण शामिल किया गया है। जिस प्रकार किसी स्त्री की जन्मकुण्डली में गजकेसरी योग, उसके दाम्पत्य की खुशहाली तथा सामंजस्य वृद्धि के साथ उसकी समृद्ध स्थिति की गारंटी देता है, ठीक इसके विपरीत विषकन्या योग पति-पुत्रहीना, सम्पत्ति हीना, सुख की न्यूनता आदि की गारंटी देता है।
Kundli Dasha
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम