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लेख

स्वयं अपनी हस्त रेखा देखकर जान सकते हैं अपनी किस्मत
रेखाओं को पढ़ना एक कला है। क्षैतिज, घुमावदार और कुटिल, हाथ में ये तीन प्रकार की रेखाएं होती है जो व्यक्ति के भविष्य के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां देती हैं। भाग्य रेखा या नियति रेखा व्यक्ति के जीवन के काफी पहलुओं को दर्शाती है। व्यक्ति का जीवन का रूप इस रेखा पर निर्भर करता है। भाग्य रेखा से स्कूल और कॅरियर के चयन, सफलताओं और बाधाओं सहित व्यक्ति के जीवन से जुड़ी सभी बातें होती हैं। यह रेखा व्यक्ति के नियंत्रण से दूर होने वाली परिस्थितियों को दर्शाती है।
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक लेख
सूर्य का कुम्भ में गोचर: जानिए आपकी राशि पर प्रभाव
वैदिक ज्योतिष में सूर्य को ‘पिता’ का स्थान दिया गया है, वह बड़ा भाई, पूर्वज आदि का भी प्रतिनिधित्व करता है। अन्य ग्रहों की तुलना में सूर्य को सबसे ऊंचा पद प्रदान किया गया है। जिस जातक की कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है उसे ना सिर्फ अपने परिवार बल्कि समाज में भी काफी सम्मान और प्रतिष्ठा हासिल होती है। वहीं, अगर कुंडली में सूर्य कमजोर या पीड़ित हो तो हालात इसके ठीक विपरीत होते हैं।
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
अकेला रहना पसंद करते हैं इन राशियों के लोग
कुछ राशियां ऐसी भी हैं जिन्हें अकेलापन पसंद है। वे अपने अकेलेपन को ना सिर्फ एंजॉय करते हैं बल्कि ये उनका फेवरेट टाइम भी होता है।
Personality
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
मंगल का वृश्चिक में गमन: 17 जनवरी से सतर्क रहें ये राशियां
मंगल ग्रह ऊर्जा, शक्ति एवं पराक्रम का कारक होता है, इसलिए कुंडली में इसका कमजोर होना जातक में क्षमता व आत्म-विश्वास की कमी लाता है। इसके अलावा यह रक्त से संबंधित बीमारियों का भी प्रतिनिधित्व करता है।
Horoscope
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
इन 4 राशि के लोगों को अमीर बनने से कोई नहीं रोक सकता
इन 4 राशि के लोगों को अमीर बनने से कोई नहीं रोक सकता
Wealth
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
सूर्य का मीन राशि में गोचर: जानिए किन राशियों को मिलेगा इस बदलाव से लाभ
सूर्य का मीन राशि में गोचर: जानिए किन राशियों को मिलेगा इस बदलाव से लाभ
Pisces
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
पारद का महत्त्व एवं विभिन्न उपाय
वैदिक रीतियों में, पूजन विधि में, समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति में पारद से बने शिवलिंग एवं अन्य आकृतियों का विशेष महत्त्व होता है।
/ प्रस्तुति : नंदिता पांडे
ज्योतिष में राजयोग सिद्धांत
राजयोग सभी योगों का राजा कहलाता है क्योंकि इसमें प्रत्येक प्रकार के योग की कुछ न कुछ विशेषता अवश्‍य मिल जाती है। अलग-अलग सन्दर्भों में राजयोग के अलग-अलग अनेक अर्थ हैं। ऐतिहासिक रूप में योग की अन्तिम अवस्था समाधि' को ही 'राजयोग' कहते थे। किन्तु आधुनिक सन्दर्भ में हिन्दुओं के छः दर्शनों में से एक का नाम 'राजयोग' (या केवल योग) है। ज्योतिष में राजयोग का अर्थ होता है कुंडली में ग्रहों का इस प्रकार से मौजूद होना की सफलताएं, सुख, पैसा, मान-सम्मान आसानी से प्राप्त हो।
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
कुंडली के ये योग बना सकते हैं आपको करोड़पति
ज्योतिष विद्या के अनुसार कुछ ऐसे अद्भुत योग हमारी कुंडली में मौजूद होते हैं जो हमें करोड़पति बना सकते हैं। अब वो कौनसे योग हैं, चलिए जानते हैं।
Wealth
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक लेख
मनोकामना पूर्ति के लिए शिवरात्रि पर करें इन खास मंत्रों से पूजा
शिव भक्तों के लिए शिवरात्रि एक बड़ा पर्व है, यूं तो हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि होती है, लेकिन फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की शिवरात्रि का विशेष महत्व है। इसलिए इसे मात्र शिवरात्रि ना कहकर ‘महाशिवरात्रि’ कहा जाता है।
Mantras
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
पंचक कितना अशुभ होता है? इस दौरान क्यों नहीं होते शुभ कार्य
पंचक को हिंदू पंचाग में बेहद ही अशुभ काल का दर्ज़ा मिला है। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान शुभ कार्य से निषेध होना चाहिए और कुछ उपाय करके इसके बुरे प्रभाव को दूर भी करना चाहिए ताकि बड़ी समस्या से बचा जा सके।
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
सुख-समृद्धि  एवं व्यापार में उन्नति के लिए दीपावली में किए जाने वाले कुछ विशेष उपाय
आप सभी को दीपावली के इस पावन पर्व की बहुत सारी शुभकामनाएं ..!! निम्नलिखित उपायों को आप खुद कर सकते हैं ..यह काफी सरल हैं एवं अचूक रामबाण की तरह काम करते हैं ..!!
/ प्रस्तुति : नंदिता पांडे
मांगलिक दोष : जानिए वास्तविक सिद्धांत
मंगल उष्ण प्रकृति का ग्रह है, इसे पाप ग्रह माना गया है और ज्योतिष विज्ञान में इसका बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। मंगल की स्थिति से रोजी रोजगार एवं कारोबार में उन्नति एवं प्रगति होती है तो दूसरी ओर इसकी उपस्थिति वैवाहिक जीवन के सुख बाधा डालती है। वैवाहिक जीवन में मंगल को विशेष अमंलकारी माना गया है। मंगल दोष कुंडली के किसी भी घर में स्थित अशुभ मंगल के द्वारा बनाए जाने वाले दोष को कहते हैं जो अपनी किसी कुंडली में स्थिति तथा बल के चलते जातक के जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। मांगलिक दोष बनाने के लिए मंगल का किसी कुंडली के घर में स्थित होना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि घर में स्थित मंगल का अशुभ तथा दोषकारी होना भी आवश्यक है।
Manglik
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
क्या अशुद्ध उच्चारण से मंत्र हानिकारक प्रभाव देते हैं?
मंत्र, शब्दों का संचय है जो इष्ट को प्राप्त करने और अनिष्ट बाधाओं को दूर करने का मार्ग है। मंत्र शब्द में ‘मन’ का तात्पर्य मन और मनन से है और ‘त्र’ का तात्पर्य शक्ति और रक्षा से है । मंत्र जप से व्यक्ति को पूरे ब्रह्मांड की एकरूपता का ज्ञान प्राप्त होता है। मन का लय हो जाता है और मन भी शांत हो जाता है। मंत्रजप के अनेक लाभ हैं- आध्यात्मिक प्रगति, शत्रु का विनाश, अलौकिक शक्ति पाना, पाप नष्ट होना और वाणी की शुद्धि आदि। ये सभी लाभ तभी प्राप्त हो सकते हैं जब व्यक्ति इनका उच्चारण ठीक प्रकार से करे।
/ प्रस्तुति : ओम प्रकाश
शुभ ग्रहों का मारकेशत्व क्रूर और पापी ग्रहों से अधिक कब होता है?
किसी भी व्यक्ति की कुण्डली के बारह भावों में बारह राशियों सहित नौ ग्रह विद्यमान होते हैं। सात मुख्य ग्रहों के साथ ही दो छाया ग्रहों, राहु व केतु की व्यक्ति के जीवन में महती भूमिका होती है।
Planets
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
क्या होते हैं उच्च, नीच, वक्री और अस्त ग्रह
भारतीय ज्योतिष में 9 ग्रह बताए गए हैं। इसमें 2 छाया ग्रह हैं। सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि ग्रह हैं जो आकाशीय मंडल में दृष्टमान हैं। राहु-केतु छाया ग्रह हैं, जो ग्रह नहीं हैं क्योंकि ये आकाशीय मंडल में दिखाई नहीं देते हैं। सूर्य ग्रहों के राजा हैं तो मंगल सेनापति , शनि न्यायाधीश हैं. शुक्र दानवों और बृहस्पति देवताओं के गुरु हैं। ये सभी ग्रह कभी उच्च-नीच नही होते , केवल ग्रहों की युतियों के कारण शुभ -अशुभ फल प्रदान करते हैं। हर ग्रह अपनी उच्‍च राशि में तीव्रता से परिणाम देता है और नीच राशि में मंदता के साथ। अगर वह ग्रह आपकी कुण्‍डली में अकारक है तो कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह उच्‍च का है या नीच का।
/ प्रस्तुति : ओम प्रकाश
जन्म कुंडली के बारह भाव और कारकत्व
ज्योतिष शास्त्र में बारह राशियों के आधार पर जन्मकुंडली के बारह भावों की रचना की गई है जिन्हें द्वाद्वश भाव कहते हैं। आकाश मण्डल में बारह राशियों की तरह कुंडली में बारह भाव (द्वादश भाव) होते हैं। जन्म कुंडली या जन्मांग जन्म समय की स्थिति बताती है। प्रत्येक भाव हमारे जीवन की विविध अव्यवस्थाओं, विविध घटनाओं को दर्शाता है। जन्म पत्रिका ग्रहों की स्थिति और लग्न बताती है। जन्म कुंडली में बारह भाव होते हैं और हर भाव में एक राशि होती है। कुँडली के सभी भाव जीवन के किसी ना किसी क्षेत्र से संबंधित होते हैं। भाव की राशि के स्वामी को भावेश कहा जाता है। भिन्न राशि वाले हर भाव का कारक निश्चित होता है। सभी बारह भाव भिन्न काम करते है और कुछ भाव अच्छे तो कुछ भाव बुरे होते हैं।
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक लेख
जब शनि ही बनाए शक्तिशाली मारक योग
ज्योतिष के कुछ नियम बेहद जटिल तरीके के मसलों पर सटीकता से प्रकाश डालते हैं। इनमें से एक नियम है शनि का मारकत्व कब और किस स्थिति में अत्याधिक प्रभावी हो जाता है। आज हम शनि के मारकत्व के संदर्भ में उदाहरण सहित चर्चा करेंगे। ध्यान रहे कि तुला और वृष लग्नों को छोड़कर अन्य 10 लग्नों में शनि के किसी न किसी रूप में मारकेश बनने की संभावना बनी रहती है। किंतु यदि किसी जातक की जन्म कुंडली में शनि द्वितीय, द्वादश, सप्तम भावों का स्वामी होकर किसी भी मारक स्थान पर विराजमान भी हो जाए तो ऐसी अवस्था में शनि के मारकेशत्व में अत्याधिक बढ़ोत्तरी हो जाती है। इसके अतिरिक्त यदि शनि का किसी भी अन्य मारकेश बनने वाले ग्रह से सीधा संपर्क हो जाए तो ऐसे मामले में शनि स्वयं ही मारकेश बन जाता है।
Kundli Dasha
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
राहु काल: विघ्न-बाधाओं को आमंत्रण देता है यह अनिष्ट काल
राहु के प्रकोप को हममें से अधिकांश लोगों ने अपनी और दूसरे की लाइफ़ में ज़रूर देखा-सुना होगा। बुद्धि-विवेक नाशक इस छाया ग्रह का प्रभाव जीवन पर सर्वाधिक पड़ता है। जिसकी भी महादशा-अंतर्दशा राहु की चलती है या फिर जब भी युति व दृष्टि द्वारा ये कुण्डली के किसी स्थान और ग्रह को प्रभावित करता है, उस दौरान इंसान के अपने ही उसके शत्रु हो जाते हैं, द्वादश बैठा राहु जेलयात्रा तक करवाने की ताकत रखता है। सबसे बुरी बात राहु के साथ ये है कि अनायास कार्य करवाता है यानि जिसकी आपको उम्मीद भी न हो, वैसे परिणाम दिलाने में इसकी ताकत लगती है। अगर कुण्डली में राहु बुरे भावों में बैठा हो साथ ही कमज़ोर व पीड़ित हो, व्यक्ति साढ़े साती के फ़ेज़ में हो तब तो अनिष्टकारी रिजल्ट ही मिलता है।
Planets
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक टीम
ज्योतिष के चुने हुए शुभ योग
ज्योतिष विद्या में नौ ग्रहों, 12 राशियों और 27 नक्षत्रों का समावेश है जिसमें सभी की अपनी महत्ता है। सभी ग्रहों का अपने आप में महत्व है लेकिन कुछ ग्रह नकारात्मक होते है जैसे राहु, केतु, मंगल और शनि। जब भी ये ग्रह कुंडली में गलत भाव या स्थिति में बैठते हैं तो व्यक्ति को भारी नुकसान भुगतना पड़ता है। राहु ग्रह अपनी दशा में ऐसी स्थितियां पैदा करता है जिसका अंदाजा भी नहीं लगाया जा सकता और जिसके आकस्मिक परिणाम होते है जो शुभ या अशुभ, हो सकते है।
/ प्रस्तुति : ऐस्ट्रोस्पीक लेख