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सुरेश श्रीमाली

सुरेश श्रीमाली

ज्योतिष शास्त्र विशेषज्ञ
परम पूज्य ज्योतिष भीष्म पितामह पंडित राधा कृष्ण श्रीमाली जैसे वेद और ज्योतिष के महान विशेषज्ञ के परिवार में जन्मे सुरेश श्रीमाली का पूरा बचपन ही आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वातावरण में व्यतीत हुआ है। उनके पिता पंडित राधा कृष्ण श्रीमाली ने अपने पुत्र की योग्यता और सक्षमता को पहले ही भांप लिया और शुरुआत से ही उन्होंने अपनी संतान को ज्योतिषशास्त्र और आध्यात्मिकता के करीब रखा। 

गुरुदेव श्रीमाली जी ने भी ज्योतिषशास्त्र को बहुत गंभीरता से लिया और अपने पिता के सपने को नया आयाम देते हुए देश के कोने-कोने तक उनके मिशन को पहुंचाने का काम किया। उन्होंने निरंतर साधना की, जिसकी सहायता से उन्हें भी अपने पिता की तरह ज्ञान के खजाने की प्राप्ति हुई। आज गुरुदेव सुरेश श्रीमाली जी, ज्योतिषशास्त्र और आध्यात्म के जरिए हजारों जरूरतमंद लोगों की सहायता कर रहे हैं।  

16 साल की उम्र में ही गुरुदेव ने अकूत ज्ञान की प्राप्ति कर ली थी, भविष्य जानने की विधा में वे निपुण हो गए थे। कुछ समय बाद उन्होंने अपना दायरा बढ़ाया और भिन्न-भिन्न शहरों और देश के महत्वपूर्ण स्थानों में अपने ज्योतिष कैंप लगाए, ताकि वे ज्यादा से ज्यादा लोगों की सहायता कर सकें। उनके हर कैंप पर लोगों की भीड़ जुट जाती थी, और वो ज्योतिषीय अध्यात्म से उनकी सहायता करते थे।
उनके अनुयायियों ने ही सुरेश श्रीमाली जी को “गुरुदेव” नाम दिया और अब वो उनके बीच गुरुदेव नाम से ही प्रख्यात हैं। गुरुदेव अपने अनुयायियों को अच्छे विचार, अच्छे कर्म और अच्छे वचन जैसे सिद्धांत पर चलने की ही शिक्षा देते हैं। 
बढ़ती लोकप्रियता के चलते गुरुदेव श्रीमाली जी को उनके गुरु और पिता ने वर्ष 2002 में अपने संदेश और मिशन को देश के साथ-साथ विदेश में भी प्रसारित करने की आज्ञा प्रदान कर दी थी। आपको यह जानकर अचंभा होगा कि अब तक वह 32 देशों में हजारों कैंपों के जरिए जरूरतमंदों की सहायता कर चुके हैं।   
वो जहां भी जाते हैं भारतीय समेत अन्य एशियाई लोग, उन्हें रेड कार्पेट स्वागत देते हैं। इनकी लोकप्रियता इस हद तक बढ़ चुकी है, कि विदेशी लोग भी गुरुदेव के अनुयायी बन चुके हैं वे ना सिर्फ उनके साथ अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त करने के उद्देश्य से आते हैं बल्कि यहां आकर वे आध्यात्मिकता से भी नजदीकी महसूस करते हैं।  
गुरुदेव बहुत से कैंप लगाते हैं लेकिन इसके बावजूद उन्हें इस बात की चिंता रहती है कि वे अपने अनुयायियों को समय नहीं दे पा रहे हैं। वैसे तो देश-विदेश से लोग उनसे मिलने के लिए समय मांगते हैं लेकिन समय की कमी और पहले से ही व्यस्त होने की वजह से वह उन्हें समय नहीं दे पाते। इसलिए वर्ष 2001 में उन्होंने टेलिविजन पर शो करने प्रारंभ किए। आज की तारीख में बहुत से टी.वी चैनलों पर उनके शो और इंटरव्यू आते हैं।
अपनी व्यस्तता के बावजूद गुरुदेव सुरेश श्रीमाली जी अध्ययन के कार्य में बिल्कुल कोताही नहीं बरतते।  “कार्य ही पूजा है” के सिद्धांत पर पर विश्वास करने वाले श्रीमाली जी का संदेश यही है कि हमें हमेशा दूसरों के प्रति अच्छी भावनाएं ही रखनी चाहिए। अगर हमारी भावनाएं शुद्ध नहीं हैं, तो हमारे द्वारा किए गए सभी कार्य और पूजा पाठ व्यर्थ हो जाते हैं। जीवित प्राणियों से प्रेम   करना, उनके प्रति सौहार्द की भावनाएं रखना ही मायने रखता है। प्राणियों की सेवा करना ही ईश्वर की सेवा करना है।

प्रख्यात टेलिवीजन सिलेब्रिटी

पिछले कई वर्षों से गुरुदेव विभिन्न टी.वी चैनलों, जैसे आस्था, संस्कार, सब टीवी, सत्संग आदि पर अपने प्रवचन दे रहे हैं। यहां वे अनुयायियों और साधकों का मार्गदर्शन करते हैं साथ ही उन्हें विभिन्न मार्ग, साधनाएं, उपाय बताने के साथ-साथ कुंडली का विश्लेषण भी करते हैं। वे लंदन में प्रसारित होने वाले मां टी.वी पर लाइव प्रोग्राम भी करते हैं ताकि जिन लोगों को उनकी सहायता की जरूरत है वह उनसे लाइव बात कर सकें।
इन्होंने अब तक ज्योतिषशास्त्र, वास्तु, फेंगशुई पर बहुत सी किताबें लिखी हैं, साथ ही साथ वह ग्रहों का खेल नामक पत्रिका भी हर महीने प्रकाशित करते हैं, जो पूरी तरह ज्योतिष वास्तु अध्यात्म पर आधारित है।
गुरुदेव के टी.वी प्रोग्राम
संस्कार: रोजाना सुबह 7 बजे

सब टी.वी: सोमवार से शुक्रवार सुबह 7 बजे इंडिया टी.वी: रात 1 बजे
सौभाग्य मिथिला: रोजाना सुबह 8:30 से 9 बजे तक, शाम 5 से 5:30 बजे तक रात 12 से 12:30 बजे तक सत्संग टी.वी: सोमवार से शनिवार सुबह 9:30 बजे

चर्चित सेवाएं (2) प्रस्तुति : सुरेश श्रीमाली