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वास्तु

वास्तुशास्त्र क्या है?

वास्तुशास्त्र एक प्राचीन भारतीय विद्या है, जिसकी सहायता से भवन, इमारत या अन्य स्थानों का निर्माण किया जाता है। ताकि उस स्थान या उसके आसपास केवल सकारात्मक ऊर्जा ही मौजूद रह सके। वास्तुशास्त्र के अंतर्गत वैज्ञानिक तकनीकों का भी प्रयोग किया जाता है, साथ ही प्रकृत्ति के नियमों और पंचभूतों का भी पूरी तरह ध्यान रखा जाता है। ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं के अनुसार निर्मा अकरने से व्यक्ति को धन-संपत्ति-समृद्धि-सफलता-खुशहाली की प्राप्ति होती है।

वास्तुशास्त्र एक ऐसा विज्ञान है जो कला, ज्योतिष, विज्ञान और खगोलविद्या को एक साथ लाती है। अगर आपको लगता है कि आपके जीवन में समस्याएं आ रही हैं या आ सकती हैं तो ऐसी स्थिति में वास्तुशास्त्र आपके लिए एक बेहतर उपाय साबित हो सकता है।

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नंदिता पांडे
नंदिता पांडे
21 वर्षों का अनुभव
ज्योतिष शास्त्र, अंकशास्त्र, टैरो, वास्तु विशेषज्ञ
एस गणेश
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37 वर्षों का अनुभव
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रितु शुक्ला
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19 वर्षों का अनुभव
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पंकज खन्ना
पंकज खन्ना
30 वर्षों का अनुभव
ज्योतिष शास्त्र, वास्तु विशेषज्ञ
ब्रह्मांड के पांच तत्वों, जल, अग्नि, वायु, भूमि और आकाश पर आधारित है भारत की प्राचीन वास्तुशास्त्र विद्या वास्तुशास्त्र पंचभूत पर आधारित विज्ञान है जिसका प्रभाव व्यक्ति के स्वास्थ्य, पारिवारिक खुशियां, संपत्ति, समृद्धि और सफलता पर पड़ता है।

हिन्दू पुराणों के अनुसार प्राचीन ऋषि-मुनियों ने वास्तुशास्त्र को मानव जीवन की सहजता के लिए बहुत उपयोगी बताया है। यह प्रकृत्ति के पांचों तत्वों को एक-दूसरे से जोड़कर मानव जीवन को सहज बनाने का काम करती है। इसके अंतर्गत दिशाओं, गुरुत्वाकर्षण, रोशनी, गर्माहट, सूर्य की किरणें आदि का उपयोग किया जाता है। बिल्डिंग, घर, ऑफिस, दुकान, आदि किसी अन्य इमारत को बनवाने के लिए या वैयक्तिक जीवन को मधुर और सफल बनाने के लिए वास्तुशास्त्र के सिद्धांतों को अपनाया जाता है।

वास्तुशास्त्र के अंतर्गत, मानव को एक विषय के तौर पर देखा जाता है। उसी को आधार बनाकर निर्माण को आगे बढ़ाया जाता है। वह इमारत के लिए डिजाइन और उसका नक्शा बनाता है, लेकिन वास्तुशास्त्र का पूरी तरह ध्यान रखने के बाद।

यह ब्रह्मांड भी पंचभूत के सिद्धांत पर गतिशील है, जिनमें जल, अग्नि, वायु, धरती और आकाश शामिल हैं। सौरमंडल के सभी नौ ग्रहों में से हमारी पृथ्वी पर ही जीवन है, क्योंकि यहां पांचों तत्व की मौजूदगी है। मानव जीवन में ग्रह आकार, इमारत के डिजाइन की क्या भूमिका है, यह तभी समझ में आ सकता है जब हम सभी तत्वों को अलग-अलग करने के बाद उनका गहराई से अध्ययन करें। तभी हम उनके अर्थ, उनकी भूमिका, कार्यशैली और महत्व की प्रशंसा कर पाएंगे।